पॉली हाउस खेती से किसानों की आय में बढ़ोतरी, बेमौसम सब्जियों की बढ़ी मांग
दीपक धुरिया अजरा न्यूज़ जालौन उरई– प्रदेश में पॉली हाउस तकनीक अपनाने के कारण बेमौसम सब्जियाँ अब बाजारों में आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। किसान नियंत्रित तापमान और अनुकूल वातावरण बनाकर पॉली हाउस के भीतर सब्जियों की खेती कर रहे हैं, जिससे न केवल उत्पादन में वृद्धि हुई है बल्कि उनकी आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। जालौन-उरई सहित प्रदेश के अनेक जिलों में यह आधुनिक तकनीक किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
पॉली हाउस एक विशेष संरचना होती है, जिसे 200 से 400 माइक्रॉन मोटी, पराबैंगनी किरणों से सुरक्षित सफेद पारदर्शी पॉलीथीन शीट से ढका जाता है। इसकी संरचना जी.आई. पाइप, बांस या लकड़ी से तैयार की जाती है। जी.आई. पाइप वाला पॉली हाउस लगभग 20 से 25 वर्ष तक टिकाऊ रहता है जबकि लकड़ी और बांस से बना पॉली हाउस 3 से 4 वर्ष तक ही टिक पाता है। पॉलीथीन कवर 2 से 3 वर्ष तक प्रभावी रहता है। पॉली हाउस में इतनी पारदर्शिता रहती है कि 70 से 80 प्रतिशत सूर्य का प्रकाश नियंत्रित रूप में फसलों तक पहुँचता है, जिससे फसलों का विकास बेहतर ढंग से हो पाता है।
किसानों के अनुसार सब्जियों और फूलों की खेती में पॉली हाउस सबसे अधिक उपयोगी साबित हो रहा है। विपरीत मौसम में भी फसलों को सुरक्षित वातावरण मिल जाता है, जिससे कीटों एवं रोगों का प्रकोप कम हो जाता है। नर्सरी उगाने, गुणवत्तायुक्त उपज प्राप्त करने, शुद्ध संकर बीज उत्पादन, फसल उत्पादन अवधि में परिवर्तन और प्रति इकाई क्षेत्र में अधिक उपज प्राप्त करने में यह तकनीक बड़े पैमाने पर लाभ देती है। शहरी और सीमांत किसानों के लिए यह तकनीक बेहद फायदेमंद साबित हो रही है।
हालाँकि पॉली हाउस निर्माण महंगा है और इसमें प्रारंभिक पूंजी की आवश्यकता अधिक होती है। साथ ही यह तकनीक मुख्य रूप से सब्जियों और फूलों की व्यावसायिक खेती के लिए ही उपयुक्त है। परंपरागत अनाज फसलों के लिए इसका उपयोग संभव नहीं है। इसके बावजूद किसानों द्वारा फूलों की व्यावसायिक खेती कर अत्यधिक लाभ अर्जित किया जा रहा है। खुले वातावरण में उगाई गई फसलें जीवित और अजीवित कारकों—जैसे रोग, कीट, कवक, जीवाणु, अत्यधिक आर्द्रता और कम प्रकाश—के कारण प्रभावित होती हैं, जिससे उनकी उत्पादकता एवं गुणवत्ता घट जाती है। पॉली हाउस का मुख्य उद्देश्य फसलों को इन सभी प्रभावों से बचाते हुए प्रतिकूल मौसम में भी बेहतर उत्पादन दिलाना है।
पॉली हाउस खेती से परंपरागत खेती की तुलना में पाँच से दस गुना अधिक उपज प्राप्त होती है। इससे वर्षभर अच्छी गुणवत्ता वाली सब्जियों और फूलों की उपलब्धता बनी रहती है। बेमौसम फसलें तैयार करने से किसानों को बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं और उनकी आय में वृद्धि होती है। संरक्षित खेती तकनीक न केवल उत्पादन बढ़ाने में मदद करती है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध कराती है।
विभिन्न क्षेत्रों की जलवायु, किसानों की आर्थिक क्षमता, बिजली की उपलब्धता और बाजार की स्थिति के अनुसार अलग-अलग प्रकार के पॉली हाउस—जैसे प्राकृतिक वायु संचालित पॉली हाउस, वातावरण अनुकूलित पॉली हाउस, लो-कॉस्ट पॉली हाउस, लो टनल, वॉक-इन-टनल और कीट अवरोधी नेट हाउस—का उपयोग किया जाता है। इन संरचनाओं के भीतर खीरा, शिमला मिर्च और संकर टमाटर जैसी सब्जियों की खेती विशेष रूप से सफल रहती है, जबकि फूलों में गुलाब, जरबेरा, लीलियम और कार्नेशन जैसी प्रजातियों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।
प्रदेश सरकार किसानों को पॉली हाउस निर्माण और संरक्षित खेती के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान कर रही है। इससे अधिक किसान आधुनिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पॉली हाउस बनाकर सब्जियों और फूलों की खेती बढ़ने से न केवल उत्पादन बढ़ा है, बल्कि किसानों की अतिरिक्त आमदनी भी लगातार बढ़ रही है।

