मकर संक्रांति का रंगीन उत्साह, आसमान में उड़ रहीं पतंगें
मकर संक्रांति का रंगीन उत्साह, आसमान में उड़ रहीं पतंगें
मकर संक्रांति का रंगीन उत्साह, आसमान में उड़ रहीं पतंगें
– पतंग व मांझे का सजा बाजार, उमड़ रहे ग्राहक
– दो दिनों तक रंग-बिरंगी पतंगो से पटा रहेगा आकाश
फोटो परिचय- बाजार में सजी पतंग व मांझे की दुकान। एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ फतेहपुर– मकर संक्रांति का पर्व इस बार विशेष उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। शहर के चारों ओर आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से पट गया है। यह खूबसूरत नजारा पर्व से लगभग पंद्रह दिन पहले से ही शुरू हो जाता है और उत्साह धीरे-धीरे चरम पर पहुंचता है। बच्चे और बड़े सभी इस परंपरा में पूरी जोश के साथ शामिल होते दिखाई दे रहे हैं।
मकर संक्रांति उत्तरायण का प्रतीक है, जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। यह फसल उत्सव के रूप में भी जाना जाता है और पूरे उत्तर भारत में पतंग उड़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। जिले में यह परंपरा खास तौर पर जीवंत है। लोग अपनी छतों (चौकों या छतों) पर चढ़कर पतंग उड़ाते हैं और पेंच लड़ाते हैं। आसमान में छोटी-बड़ी, रंगीन और आकर्षक डिजाइन वाली पतंगें एक साथ उड़ती दिखाई देती हैं, जो देखने में बेहद मनमोहक लगता है। इस उत्साह को देखते हुए बाजारों में पतंग और मांझे (डोर) की दुकानें एक महीने पहले से ही सजनी शुरू हो जाती हैं। लोग दूर-दूर से आकर अपनी पसंद की पतंगें खरीदते हैं। मंगलवार को भी शहर के प्रमुख बाजारों, मुख्य क्षेत्रों और यहां तक कि ग्रामीण इलाकों में भी पतंगों की दुकानें जमकर सजी रहीं। दुकानों पर बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक की भीड़ लगी रही। लोग बड़ी संख्या में पतंगें, मांझा, लट्टू और अन्य सामान खरीदते नजर आए। इस बार खास बात यह है कि बच्चे पहले से ही उत्साहित होकर ढेर सारी पतंगें खरीद चुके हैं, ताकि पर्व के दिन वे खुलकर पतंगबाजी का आनंद ले सकें। वैसे तो मकर संक्रांति हर साल 14 जनवरी को मनाई जाती है, लेकिन पंचांग और उदया तिथि के अनुसार इस साल कुछ जगहों पर लोग इसे 15 जनवरी को भी उत्साहपूर्वक मना रहे हैं। हालांकि अधिकांश स्रोतों के अनुसार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की दोपहर में हो रहा है, लेकिन स्थानीय परंपरा और उत्साह के कारण जिले में दोनों दिनों आसमान पतंगों से रंगीन रहने की उम्मीद है। इस पर्व पर लोग न केवल पतंग उड़ाते हैं, बल्कि स्नान-दान, खिचड़ी का प्रसाद, तिल-गुड़ के लड्डू और परिवार के साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं। जिले में यह त्योहार उमंग, खुशी और पुरानी परंपराओं का बेहतरीन संगम बन जाता है। आकाश में लहराती ये रंग-बिरंगी पतंगें न सिर्फ आंखों को सुकून देती हैं, बल्कि दिलों में भी नई ऊर्जा भर देती हैं।