भक्ति उम्र की मोहताज नहीं: व्यास जी महाराज, मौनी अमावस्या पर्व पर भक्तों ने किया स्नान
भक्ति उम्र की मोहताज नहीं: व्यास जी महाराज, मौनी अमावस्या पर्व पर भक्तों ने किया स्नान
भक्ति उम्र की मोहताज नहीं: व्यास जी महाराज
– श्रीमद भागवत महापुराण कथा का रहा चौथा दिन
फोटो परिचय- कथा मे ंप्रवचन करते व्यास जी महाराज। एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ फतेहपुर। श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के चौथे दिन कथा पंडाल भक्ति व श्रद्धा से सराबोर रहा। कथा व्यास ने अपने प्रवचन में कहा कि भक्ति किसी उम्र की सीमा तय नहीं करती। आज के समय में लोग यह कहते हैं कि बुढ़ापे में भजन करेंगे, लेकिन क्या भक्ति के लिए बुढ़ापे का इंतज़ार आवश्यक है शास्त्रों के उदाहरण इस सोच को पूरी तरह नकारते हैं।
कथा व्यास ने भक्त प्रह्लाद का उदाहरण देते हुए कहा कि वे मात्र सात वर्ष की आयु में भक्ति के महान आचार्य बने, वहीं केवल पांच वर्ष की उम्र में ध्रुव जी ने कठोर तपस्या कर भगवान के साक्षात दर्शन किए। इससे यह स्पष्ट होता है कि सच्ची भक्ति का संबंध उम्र से नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और निष्ठा से है। चौथे दिन की कथा के दौरान श्रीराम जन्मोत्सव एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को भव्य एवं धूमधाम से मनाया गया। भजन-कीर्तन, जयघोष और भक्तों के उल्लास से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर प्रभु जन्म की झांकी के दर्शन किए और कथा का रसपान किया। कथा व्यास ने कहा कि यदि बाल्यकाल से ही मनुष्य के जीवन में भक्ति का संस्कार पड़ जाए, तो उसका जीवन धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर स्वतः अग्रसर हो जाता है। इस अवसर पर परीक्षित श्रवण कुमार पत्नी शिव देवी एवं महावीर सिंह पत्नी राजकुमारी सहित सनातन धर्म रक्षा महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत चक्रेश महाराज, प्रदेश सचिव शिवकुमार पाठक, जिला प्रभारी अमर सिंह परिहार, जिलाध्यक्ष विवेक सिंह, रोहित कुमार, सुनील शुक्ल, आशीष ठाकुर, शिवम तोमर, नीरज पाल, विकाश सिंह, सतेंद्रदत्त अग्निहोत्री, राहुल सिंह, देवशरण निषाद, गिरीश शर्मा, नरेंद्र शर्मा, राजू निषाद, प्यारे निषाद सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारी, संत-महात्मा एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रीय श्रद्धालु उपस्थित रहे। ——————————— मौनी अमावस्या पर्व पर भक्तों ने किया स्नान – गंगा में स्नान करने से पापों का होता नाश एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ खागा, फतेहपुर। क्षेत्र के नौबस्ता गंगा घाट पर रविवार को मौनी अमावस्या पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। तड़के भोर से ही श्रद्धालुओं का गंगा घाट पर पहुंचना शुरू हो गया। दूर-दराज के गांवों से आए महिला-पुरुषों ने पवित्र गंगा में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। मान्यता के अनुसार मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान से समस्त पापों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
गंगा स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र व दक्षिणा का दान किया। घाट पर हर-हर गंगे और जय मां गंगे के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। इसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु नौबस्ता स्थित प्राचीन शिव मंदिर पहुंचे, जहां विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक किया गया। भक्तों ने गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में दिन भर पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा। स्थानीय पुरोहित पंडित परमेश्वर प्रसाद तिवारी के अनुसार मौनी अमावस्या पर मौन रहकर स्नान और दान करने का विशेष महत्व है। कई श्रद्धालुओं ने मौन व्रत रखकर पूजा-अर्चना की। पर्व के अवसर पर घाट और मंदिर परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था भी की गई थी। शाम होते-होते श्रद्धालुओं का लौटना शुरू हुआ।