जरौली में श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर उमड़ा सैलाब

      जरौली में श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर उमड़ा सैलाब
– महंत चक्रेश जी महाराज के आगमन से गूंजा पंडाल
– सुदामा चरित्र की कथा सुन फूट-फूटकर रोए श्रद्धालु
फोटो परिचय-  श्रीमद भागवत कथा के समापन पर श्रद्धालु।
एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ फतेहपुर। जरौली में सनातन धर्म रक्षा महासंघ के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का सप्तम एवं अंतिम दिवस धर्म, आस्था और भावनाओं के विस्फोट के साथ इतिहास बन गया। कथा स्थल श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया और हर दिशा से जय श्रीकृष्ण के गगनभेदी जयघोष गूंज उठे।
सप्तम दिवस पर कथा व्यास भार्गव मुनीश जी महाराज ने जैसे ही सुदामा-कृष्ण की निष्काम मित्रता और राजा परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई, पूरा पंडाल भावनाओं के सागर में डूब गया। श्रद्धालुओं की आंखों से आंसू बह निकले, वातावरण करुणा और भक्ति से सराबोर हो गया। कलियुग के प्रभाव पर दिए गए उनके तीखे संदेश ने श्रोताओं को झकझोर कर रख दिया। इसी दौरान कथा स्थल पर सनातन धर्म रक्षा महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत चक्रेश जी महाराज का भव्य और ऐतिहासिक आगमन हुआ। पुष्पवर्षा, शंखनाद और जयघोष से पंडाल गूंज उठा। श्रद्धालुओं में ऐसा उत्साह देखने को मिला मानो धर्म का उत्सव अपने चरम पर पहुंच गया हो। मंच से गरजते हुए महंत चक्रेश जी महाराज ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए समाज को एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब सनातन संस्कृति को कमजोर करने वाली ताकतों का डटकर मुकाबला किया जाए। उनके उद्बोधन पर श्रद्धालुओं ने करतल ध्वनि और जयघोष के साथ समर्थन जताया। भजन-कीर्तन, हरि नाम संकीर्तन और जय श्रीकृष्ण के नारों से पूरा क्षेत्र गुंजाएमान हो उठा। अंत में विधिवत पूर्णाहुति, महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ श्रीमद्भागवत कथा का ऐसा भव्य समापन हुआ, जिसकी गूंज लंबे समय तक क्षेत्र में सुनाई देगी। आयोजक संस्था सनातन धर्म रक्षा महासंघ ने संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं और ग्रामवासियों का आभार जताते हुए इसे सनातन चेतना का ऐतिहासिक अध्याय बताया।

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