अधिवक्तओ ने एसपी का तबादला, सीओ व कोतवाल का मांगा निलंबन

    वरिष्ठ अधिवक्ता की निर्मम हत्या के विरोध में साथी वकीलों ने दिया धरना
अधिवक्तओ ने एसपी का तबादला, सीओ व कोतवाल का मांगा निलंबन
हत्या में शामिल अभियुक्तों की वकील नहीं करेंगे पैरवी
– कप्तान ने संभाली जयराज के हत्या के खुलासे की खुद कमान
फोटो परिचय- पटेलनगर चौराहे पर धरने में बैठे अधिवक्ताओं से वार्ता करते डीएम व एसपी।
एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ फतेहपुर। एक हफ्ते में पहले असोथर, थरियांव, गाजीपुर एवं मलवां में अलग-अलग घटनाओं में हुई पांच हत्याओं से आशंकित हुई पुलिस के साथ लोगों की दहशत अभी कम नहीं हुई थी कि पुलिस अधीक्षक आवास से सटे जमींदार जयराज मानसिंह की हाई प्रोफाइल हत्या ने खाकी में 440 वोल्ट का करंट दौड़ा दिया। रसूखदार की हुई हत्या ने जहां सबको सन्न किया वहीं पुलिस अधीक्षक सहित आला अफसर घटनास्थल तक रातों-रात दौड़े चले आए। हत्या का राजफाश करने के लिए पुलिस की टीमें लगी हुईं हैं। खुलासा भी हो जाएगा लेकिन जयराज मानसिंह की हुई निर्मम हत्या ने एक सवाल जरूर खड़ा किया है कि क्या भू-माफियाओं के हौसले इतने बढ़ गए हैं कि जमीन नहीं तो जान का सौदा करना ही पड़ेगा। स्वभाव के अनुकूल जयराज मानसिंह को अपनी जमीनों की कीमतों को बढ़ाने का महवरा मालूम था। एक नंबर के पैसे की डिमांड जमीन कारोबारियों को बेचैन करती थी। हाल ही में पुलिस अधीक्षक आवास से सटे हुए आलीशान बंगले एवं बड़े बाग की बिक्री की चर्चा जोरों पर थी। कई लोगों की निगाहें इन वेशकीमती जमीनों पर थीं। खबर तो यह भी है कि कई सफेदपोश भी जयराज की जमीन व बंगले का सौदा करना चाह रहे थे।


मानसिंह परिवार का जमीनों के मामले में जिले में अपना रुतबा और रसूख रहा है। शहर में जिस ओर नजर जाती है उस ओर उनके परिवार की जमीनें ही नजर आती हैं। जयराज मानसिंह व्यवसाय के चतुर खिलाड़ी थे। जमीनों के भाव ऊपर ले जाने का उन्हें फंद मालूम था। एक-एक जमीन का सौदा उनका सालों चलता था। बुलेट चौराहे की जिस जमीन को करोड़ों में बेचा गया उसके सौदे की शुरुआत भी लाखों से की गई थी और दाम बढ़ते-बढ़ते करोड़ों तक पहुंच गए। सौदा बड़े पूंजीपति से ही नंबर एक की पूंजी के लेने की जिद के चलते हो सका। एक बार फिर बड़े बाग एवं एसपी बांग्ला के बगल के उस आशियाने की बिक्री की हवा तेज थी। जिसको खरीदने के लिए कई खादीधारी एवं जमीन कारोबारी व्याकुल थे। खरीदार अपने-अपने संपर्कों से जयराज मानसिंह तक पहुंचने की जुगत-जुगाड़ में रहे। जयराज के कारखास रहे अंकित मिश्र जमीनी सौदों को जमीन कारोबारियों से करवाने के लिए प्रयासरत था। खबर है कि एक के बाद एक कई लोगों से बड़ी बाग का सौदा हुआ और टूटा। बड़ी बाग को लेने के इच्छुक हर कारोबारी की इस जमीन पर निगाह लगी थी लेकिन सौदा मुकाम नहीं पा रहा था। बाग की बिक्री को लेकर जिस अंकित मिश्र को पुलिस ने उठाया है उसे जयराज ने कुछ नजराना भी दे रखा था। खरीदार कई लगे थे। कई सफेदपोशों की भी निगाह बेशकीमती जमीनों पर लगी थी लेकिन इस बीच जमीन को लेकर क्या खेल बिगड़ा कि रसूखदार को कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

आज नहीं तो कल, कल नहीं तो बाद में पुलिस इस हाई प्रोफाइल हत्या की गुत्थी को सुलझाने में सफलता पा लेगी लेकिन घटना का सही खुलासा कई बड़े जमीन कारोबारियों के चेहरों से नकाब हटाने का काम करेगा लेकिन एक बात तय है कि जिस तरह से जिले में जान के दुश्मनों ने एक सप्ताह में ही एक के बाद एक घटनाओं को अंजाम दिया है उससे ऐसा लग रहा है कि जैसे हत्यारों ने पुलिस को खुली चुनौती दे रखी है और दोआबा की इस धरती को अपराधियों ने लाल करने का ठेका ले रखा हो। जयराज पेशे से अधिवक्ता भी थे जिससे साथियों में आक्रोश व्याप्त हो गया है। प्रशासन व पुलिस के खिलाफ नारेबाजी व प्रदर्शन शुरू हो गया है। घटना के खुलासे को लेकर पुलिस अधीक्षक अनूप सिंह ने स्वयं कमान संभाल रखी है। अब देखना यह है कि खेल के अंदर और फंद के बाहर रहने वाले कितने चेहरे नजर आएंगे। हत्या के विरोध में धरनास्थल पर बार अध्यक्ष गया प्रसाद दुबे, महामंत्री जितेंद्र सिंह गौतम, पूर्व बार अध्यक्ष बाबू सिंह यादव, देवेंद्र गौतम, पूर्व मंत्री बुद्धि प्रकाश सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। धरना स्थल पर डीएम रविंद्र सिंह व एसपी अनूप सिंह ने पहुंचकर अधिवक्ताओं से वार्ता कर धरना का ईमानदारी से खुलासा करने व पीड़ित परिवार की सुरक्षा का आश्वासन दिया। इसके बाद धरना समाप्त हो गया धरने के चलते विद्यार्थी चौराहे व पटेल नगर चौराहे से कचहरी मार्ग बाधित्त रहा।

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