पुण्यतिथि, जन्मतिथि, मासिक बैठक,समारोह व कार्यालय तक सीमित सपा, जनता से काफी दूर

   पुण्यतिथि, जन्मतिथि, माल्यार्पण, मासिक बैठक, शादी समारोह व जिला कार्यालय तक सीमित सपा,,, जनता से काफी दूर,,,,
👉 पदाधिकारियों की शिथिलता, कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता कहीं ले न डूबे फिर सपा की नैय्या
👉नगर संगठन का शून्य होना कार्यकर्ताओं द्वारा जिला संगठन को घेरे में लेता नज़र आ रहा
👉 सपा से जीते हुए सांसद, विधायक व सभासद जन समरसता से कहीं दूर दिखाई दे रहे
👉समाजवादी पार्टी से जीते सभासद भी अपने बूथ पर जनसमस्याएं व योजनाओं का नहीं दिला पा रहे लाभ, वोटरों के मुंह बिचके
👉 किसी नाहक गुमान के चलते सपा के आलाकमान नींद में ,,,
👉 समय रहते यदि न जागे तो 2022 के नतीजों से फिर सामना करने को रहे तैयार, सपा
👉एसआईआर फार्म संशोधन, फॉर्म 6 व फॉर्म 7 के लिए पार्टी लेबल के बीएलओ रहे नदारद
👉 समाजवादी के राष्ट्रीय अध्यक्ष “अखिलेश यादव” ने मांगी जिले से समीक्षा रिपोर्ट,, हो सकता है पार्टी के अंदर बड़ा उलटफेर

     एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज

अज़रा न्यूज फतेहपुर — इन दिनों शहर में जनता के बीच समाजवादी पार्टी में “सांसद गैंग” की चर्चा आम है। जिसको लेकर कार्यकर्ताओं में कहीं न कहीं अंदरूनी नाराज़गी बनी हुई है। सपा से जीते सांसद के आसपास चंद सपाई कार्यकर्ताओं को साथ ही देखा जाना और उन्हीं की चलना पार्टी के अंदर ख़ल्फ़शार का विषय माना जा रहा। नगर संगठन का “तनवीर हैदर” के स्वर्गवास के बाद शून्य स्थिति पर पड़ा रहना भी चर्चा का विषय बना है। जिलाध्यक्ष की बीमारी को लेकर, पार्टी के अन्य इकाइयों के अध्यक्ष व बड़े पदासीन कार्यकर्ता सारा ठीकरा अध्यक्ष पर फोड़कर खुद निष्क्रिय तमाशबीन से दिख रहे।
जो करें सो अध्यक्ष ही करें,,, खुद को रूलिंग न सही सेकेंड रनिंग पार्टी के पदाधिकारी मान कर शादी विवाह , जन्मतिथि पुण्यतिथि जैसे कार्यक्रमों तक सीमित होकर फोटो शॉप में मस्त।
युवा मोर्चा, पिछड़ा मोर्चा, अल्पसंख्यक मोर्चा की राजनीति प्रायः जन समरस्ता से दूर बस फोटो शॉप तक ही सीमित रह गई,,, चर्चित सांसद गैंग में शामिल बस पांच से छह लोगों के बीच सिमटती सपा अपने 2022 में हुए चुनाव का हाल देख ले।
एसआईआर से लेकर फॉर्म सिक्स और फॉर्म सेवन तक मतदाता सूची तैयार कराने एवं उसमें संशोधन कराने के दौरान जमीनी स्तर पर एक दो वार्ड यदि हटा दिए जाए तो स्वयं ही मुस्लिम मतदाता के बीच सपा सरवरा कहीं जिम्मेदारी से नजर नहीं आया। ख़ुद ही मुस्लिम मतदाता फार्म लेकर इधर उधर बीएलओ के चक्कर काटते दिखे।
एसआईआर अभियान में पीडीए प्रहरी मजबूती से डटे रहे,,, जैसे मीडिया बयान तक की सीमित रहे।
हां एक नजर समाजवादी पार्टी खागा इकाई पर नज़र डाले तो,, खागा से पूर्व विधायक प्रत्याशी डीआईजी “राम तीर्थ परमहंस जो एसआईआर फार्म सेवन की स्थिति को लेकर एसडीएम से वार्ता कर फॉर्म व मतदाता सूची की गड़बड़ी को लेकर गंभीर आरोप लगाकर एक सुनियोजित साजिश बताकर वोटर लिस्ट पर स्वयं लगे भी दिखे। जिसमें अन्य जातियों के साथ बड़ी संख्या में मुस्लिम वोटरों के साथ खेल कर दिए जाने की बात रखी।
समाजवादी पार्टी का सबसे बड़ा वोटबैंक मुस्लिम वोटर की यदि बात की जाए तो एसआईआर का भयावह भूत का खौफ मुस्लिम वोटर ही रहा और है। वहीं सपा का अल्पसंख्यक मोर्चा एसआईआर संशोधन प्रक्रिया तो दूर दिलासा देने के काम भी नहीं आया। वही जानकारी के अभाव से प्रत्येक वार्ड में मुस्लिम पुरुष व महिला वोटर इधर उधर बीएलओ के आसपास सदैव की तरह सपा केंद्रित वोटर मुस्लिम वोटरों की लंबी और थका देने वाली जद्दोजह नज़र आई।
इन्हीं सब शिकायतों की कहीं न कही जानकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तक पहुंचाई गई जिसके चलते कुछ नए नतीजों का परिणाम देखने को मिल सकते है

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