बिना रोक-टोक लग रहे सबमर्सिबल पंप, सड़कों पर बहाया जा रहा पानी

     धरती की गगरी को खाली करने में जुटे पानी माफिया
बिना रोक-टोक लग रहे सबमर्सिबल पंप, सड़कों पर बहाया जा रहा पानी
फोटो परिचय-  तांबेश्वर मंदिर के समीप सूखा पड़ा तालाब।
एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ फतेहपुर– शहर हो या गांव हर घर में बिना रोक-टोक सबमर्सिबल पंप लग रहे हैं। कई लोग रोज घंटों अपनी कार धोते रहते हैं, तो कहीं सड़क पर पानी ऐसे ही बहा दिया जाता है। पानी माफिया धरती की गगरी को खाली करने में लगे हुये हैं।
एक ओर पानी की बर्बादी के नजारे आम हैं, तो दूसरी ओर दूरदराज से पानी लाने का संघर्ष भी नजर आता है। नलकूप, कुएं और जलाशय सूख रहे हैं। विश्व जल संरक्षण दिवस के मौके पर फिर से सेमिनार होंगे। लोगों को पानी का महत्व याद दिलाया जाएगा। वास्तविकता यह है कि अवैध जल दोहन के खिलाफ सरकार की सख्त नीति न होने, सबमर्सिबल पंप के उपयोग पर कोई नियंत्रण नीति न बनाए जाने से अमूल्य धरोहर जल धरती के भीतर समाप्त हो रहा है। पानी के रिचार्ज होने के रास्ते दिन पर दिन बंद हो रहे हैं। गांव में तालाब और शहरों में ग्रीन बेल्ट लगातार कम होती जा रही है। जिले से कानपुर तक भूजल स्तर गिर रहा है। विशेषज्ञ डरावने वाले आंकड़े बता रहे हैं। उनका कहना है कि न केवल सरकार, बल्कि आम लोगों के लिए भी अब प्रदेश में जल संकट पर भयभीत होने वाली स्थिति पैदा हो रही है। प्रदेश में जल संकट एक गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। राज्य की बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण और कृषि पर निर्भरता ने जल संसाधनों पर दबाव बढ़ा दिया है। प्रदेश के 900 ब्लॉक में स्थिति भयावह हो चुकी है। भूगर्भ जल के अंधाधुंध दोहन के परिणाम स्वरूप प्रदेश देश में भूजल दोहन के लिहाज से टॉप पर हैं। दूरदराज के जिले छोड़ दें, तो राजधानी लखनऊ में भूजल का दोहन तेजी से बढ़ता जा रहा है। स्थानीय निकाय निदेशालय से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश के करीब 700 स्थानीय निकायों में से 622 में आपूर्ति भूगर्भ जल के जरिये ही की जाती है।


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जिले में बिगड़ रहे हालात
युवा विकास समिति के संस्थापक और जल संरक्षण कार्यकर्ता ज्ञानेंद्र मिश्रा ने बताया कि प्रदेश स्तर पर लखनऊ की स्थिति सबसे भयावह है। यहां जल का दोहन करीब सात अरब लीटर प्रति वर्ष हो रहा है। जलकल महकमा नलकूपों से 5.6 करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति प्रतिदिन कर रहा है। इसके अलावा बहुमंजिला भवन, होटल, अस्पताल, औद्योगिकी क्षेत्र, सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों, रेलवे और घरों में लगे करीब एक लाख सबमर्सिबल पंपों व गहरी बोरिंग से हजारों करोड़ लीटर पानी निकाला जाता है।


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भूगर्भ जलस्तर में गिरावट
केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में भूजल स्तर में सालाना 10-20 सेंटीमीटर की गिरावट देखी जा रही है। 2017 के संसाधन मूल्यांकन में नौ जिले आगरा, अमरोहा, फिरोजाबाद, गौतम बुद्धनगर, गाजियाबाद, हापुड़, हाथरस, संभल और शामली अत्यधिक दोहन की श्रेणी में थे, जहां दोहन 100 प्रतिशत से अधिक था।

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