बेतवा नदी में अवैध खनन का मामला गरमाया, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
बेतवा नदी में अवैध खनन का मामला गरमाया, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
बेतवा नदी में अवैध खनन का मामला गरमाया, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
दीपक धुरिया अजरा न्यूज़ जालौन – जनपद में बेतवा नदी पर अवैध खनन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। आरोप है कि खनन माफिया नियमों को नजरअंदाज कर नदी की मुख्य जलधारा के बीच खुलेआम खनन कर रहे हैं, जबकि इस संबंध में उच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के स्पष्ट निर्देश जारी हैं।
जानकारी के अनुसार, मामला हिमनपुरा क्षेत्र स्थित मोरंग खदान खंड संख्या-04 का है, जहां बड़ी पोकलैंड मशीनों के माध्यम से दिन-रात खनन किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि खनन निर्धारित सीमा से बाहर निकलकर निजी भूमि तक फैल चुका है।
ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों का कहना है कि नदी की धारा में हो रहा खनन पर्यावरण संतुलन और जल प्रवाह को प्रभावित कर रहा है। इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
इस पूरे प्रकरण में खनिज विभाग एवं जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि प्रशासनिक सख्ती के दावों के बावजूद अवैध खनन पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।
इसी बीच, चर्चाओं में कोमल यादव का नाम भी सामने आ रहा है, जिन पर संरक्षण देने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। ऐसे में देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या बेतवा नदी में अवैध खनन पर प्रभावी रोक लग पाती है या नहीं।