गौ-संरक्षण पर; समीक्षा बैठक में प्राकृतिक खेती और गौशालाओं की व्यवस्थाओं पर निर्देश
गौ-संरक्षण पर; समीक्षा बैठक में प्राकृतिक खेती और गौशालाओं की व्यवस्थाओं पर निर्देश
गौ-संरक्षण पर जोर: समीक्षा बैठक में प्राकृतिक खेती और गौशालाओं की व्यवस्थाओं पर सख्त निर्देश
संदीप धुरिया अजरा न्यूज़ हमीरपुर — हमीरपुर। उत्तर प्रदेश गौ-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्ता की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में गौ-संरक्षण एवं अनुश्रवण समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में गौशालाओं की व्यवस्थाओं, गौवंश संरक्षण, प्राकृतिक खेती और मृदा स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार जनपद में गौवंशीय पशुओं की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। 20वीं पशुगणना में जहां यह संख्या 1,41,151 थी, वहीं 21वीं पशुगणना में घटकर 1,03,796 रह गई है। वर्तमान में विभिन्न गौ-आश्रय स्थलों में 38,851 गौवंश संरक्षित हैं।
मृदा स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया गया कि ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा आदर्श 0.75 प्रतिशत से काफी कम, 0.3 प्रतिशत से भी नीचे है। इसे सुधारने के लिए गोबर खाद, कंपोस्ट, हरी खाद और फसल अवशेषों के उपयोग के साथ नियमित मृदा परीक्षण पर बल दिया गया।
अध्यक्ष ने सभी गौशालाओं में हरा चारा, भूसा, स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त शेड और पशुओं के उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही शत-प्रतिशत टीकाकरण, 6 माह का भूसा भंडारण और गौ तस्करी व क्रूरता पर सख्त नियंत्रण के आदेश दिए गए।
गौ-संवर्धन के तहत उन्नत नस्ल के नंदी, सेक्स सॉर्टेड सीमेन तकनीक से उच्च गुणवत्ता वाले बछड़ों के उत्पादन और संतुलित आहार की उपलब्धता पर जोर दिया गया। चारा उत्पादन बढ़ाने के लिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को भी बढ़ावा देने की बात कही गई।
बीमार पशुओं के लिए अलग आइसोलेशन वार्ड और प्रत्येक विकासखंड स्तर पर नंदी हेतु अलग गौशाला स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। साथ ही गौ आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, गोबर और गोमूत्र से जैविक उत्पाद तैयार कर रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया गया।
बैठक में गोबर गैस संयंत्रों के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन तथा गोबर से बने उत्पादों के जरिए ग्रामीण रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की बात भी सामने आई।
इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों (SHGs), किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और युवाओं की भागीदारी से गौशालाओं के बेहतर संचालन पर जोर दिया गया।
बैठक में विभिन्न विभागों के समन्वय से “गौ आधारित समग्र विकास मॉडल” लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया गया, जिससे मृदा सुधार, जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।
इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष शकुंतला निषाद, मुख्य विकास अधिकारी अरुण कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) रिजवाना शाहिद, जिला विकास अधिकारी राघवेंद्र सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. भूपेंद्र सिंह यादव सहित अन्य अधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।