आस्था और पर्यावरण चेतना का केंद्र बना प्राचीन कहमानी माता मंदिर
आस्था और पर्यावरण चेतना का केंद्र बना प्राचीन कहमानी माता मंदिर
आस्था और पर्यावरण चेतना का केंद्र बना प्राचीन कहमानी माता मंदिर
ब्यूरो सुरेंद्र धुरिया अज़रा न्यूज बांदा बदौसा (बांदा)। बांदा-चित्रकूट-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग पर बदौसा थाने के सामने से करीब तीन किलोमीटर दूर बागेन नदी के तट पर स्थित प्राचीन कहमानी माता मंदिर अंचल की अगाध आस्था का मुख्य केंद्र है। मान्यता है कि जागृत पीठ होने के कारण यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। विशेषकर शारदीय व चौत्र नवरात्रि में यहां समूचे क्षेत्र से प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। इस दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ और मार्ग के कुछ हिस्से सुनसान होने के चलते स्थानीय ग्रामीणों व श्रद्धालुओं ने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था सुचारू करने की मांग की है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि महापर्व में महिला व बालिकाओं की भारी आमद रहती है, ऐसे में सुनसान रास्तों पर पुलिस बल की मुस्तैदी और भीड़भाड़ में चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाना बेहद जरूरी है। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा प्रतिवर्ष किए जाने वाले विशेष अनुष्ठान और पारंपरिक पूजा यहां की अनूठी पहचान हैं।
धार्मिक चेतना के साथ-साथ यह परिसर सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण का भी गवाह है। क्षेत्रवासियों के सहयोग से नवनिर्मित भव्य मंदिर के साथ ही समीप स्थित प्राचीन मूल मंदिर के पौराणिक विग्रह व स्वयंभू पिंडियां आज भी विशेष पूजनीय हैं। हर वर्ष फरवरी माह में यहां भारतीय उद्योग व्यापार मंडल व क्षेत्रीय जनता के संयुक्त प्रयास से भव्य मेला और विशाल दंगल आयोजित होता है, जिसमें दूर-दराज के नामी पहलवान हिस्सा लेते हैं। इस वार्षिक आयोजन व मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारू रखने में व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष विजय यादव, जिला उपाध्यक्ष शिवप्रसाद श्शीवाश् व सक्रिय सदस्य रामजस निषाद की टीम अग्रणी भूमिका निभाती है। मंदिर के पुजारी कृपानंद दास जी महाराज के सानिध्य में सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं। वहीं स्थानीय सेवादार विनोद गुप्ता उर्फ लालू भी निरूस्वार्थ भाव से व्यवस्थाएं संभालते हैं। उनकी एक विशेष पहचान यह भी है कि वे हर वर्ष मंदिर प्रांगण में वृक्षारोपण करते हैं और लगाए गए पौधों की स्वयं नियमित देखरेख भी करते हैं। उनका कहना है कि माता के इस पावन दरबार से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटता।