रामलीला के 13वें दिन सीता की खोज और लंका दहन का किया गया मंचन

    रामलीला के 13 वें दिन सीता की खोज और लंका दहन का किया गया मंचन
– सोने की लंका रही आकर्षण का केंद्र

ब्यूरो सुरेंद्र धुरिया अज़रा न्यूज बांदा– बबेरू/बांदा। बबेरू कस्बे के रामलीला मैदान में शनिवार और रविवार की मध्यरात्रि रामलीला के 13वें दिन माता सीता की खोज और लंका दहन की लीला का भव्य मंचन किया गया। इस दौरान सोने की लंका दर्शकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। हजारों की संख्या में पहुंचे दर्शकों ने रामलीला के मंचन का आनंद लिया। बता दें कि बबेरू कस्बे में स्वामी वीर दास बाबा की अनुकंपा से पिछले 180 वर्षों से रामलीला का आयोजन होता चला आ रहा है। इसी परंपरा के तहत आयोजित रामलीला में कलाकारों ने सीता की खोज, रावण-हनुमान संवाद और मेघनाद-हनुमान युद्ध का जीवंत मंचन किया।

लीला के दौरान रावण और हनुमान के बीच संवाद हुआ। इसके बाद मेघनाद और हनुमान के बीच युद्ध का मंचन किया गया। मेघनाद द्वारा हनुमान की पूंछ में आग लगाए जाने के बाद हनुमान ने सोने की लंका में पहुंचकर आग लगा दी। इस दृश्य को देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे। सोने की लंका और लंका दहन के दृश्य ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। रामलीला में विभिन्न पात्रों का अभिनय करने वाले कलाकारों ने अपने शानदार प्रदर्शन से दर्शकों का मन मोह लिया। भगवान राम की भूमिका तनमय पांडेय, लक्ष्मण की राघव पांडेय, माता सीता की रुद्र मिश्रा, हनुमान की अवधेश गौतम, सुग्रीव की राजेंद्र अवस्थी, जामवंत की गोरेलाल मिश्रा, अंगद की देवानंद द्विवेदी, रावण की रविशंकर पांडेय, मेघनाद की शिवा स्वर्णकार, अक्षय कुमार की गोविंद यादव और विभीषण की भूमिका बाबूलाल राजपूत ने निभाई। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष दुर्गेश सिंह गौतम प्रबंधक नीरज पांडे कोषाध्यक्ष शिव मोहन यादव शिव प्रकाश मालिक आचार्य दिलीप सोनी गोरेलाल मिश्रा, वही रामलीला के भव्य मंचन को देखने के लिए देर रात तक रामलीला मैदान में दर्शकों की भीड़ जुटी रही। 180 वर्षों से चली आ रही इस ऐतिहासिक परंपरा के प्रति लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।

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