तमिलनाडु के लिए अलग झंडे की मांग से बढ़ा विवाद, भाजपा ने जताया विरोध

चेन्नई। तमिलनाडु में राज्य के लिए अलग ध्वज की मांग को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। तमिलनाडु सरकार में मंत्री आधव अर्जुन ने राज्य के लिए एक अलग झंडा बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह ध्वज राष्ट्रीय ध्वज के बराबर होना चाहिए और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को इसे सबसे पहले फहराना चाहिए। भाजपा ने मंत्री के इस बयान पर आपत्ति जताते हुए इसे अलगाववादी सोच को बढ़ावा देने वाला बताया है।
तमिल पहचान के लिए अलग ध्वज की मांग
मंत्री आधव अर्जुन ने कहा कि तमिलनाडु की अपनी पहचान को दर्शाने के लिए अलग झंडा होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री 18 जुलाई और 1 नवंबर को इस ध्वज को फहराएं। 18 जुलाई को वर्ष 1967 में मद्रास राज्य का नाम तमिलनाडु करने से संबंधित विधानसभा प्रस्ताव की याद में मनाया जाता है, जबकि 1 नवंबर 1956 में भाषाई आधार पर राज्यों की सीमाओं के पुनर्गठन से जुड़ा है। मंत्री ने यह भी कहा कि प्रस्तावित झंडे को राज्य के प्रत्येक घर में फहराया जाना चाहिए।
भाजपा ने बयान पर जताई आपत्ति
भाजपा नेता विनोज पी. सेल्वम ने अलग राज्य ध्वज की मांग पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि तमिल पहचान को स्थापित करने के लिए अलग झंडे की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि तमिल भाषा और संस्कृति की अपनी पहचान है तथा भारतीय तिरंगे के नीचे तमिल पहचान किसी भी तरह कम नहीं होती।
सेल्वम ने आरोप लगाया कि इस तरह की बयानबाजी तमिल और भारतीय पहचान को एक-दूसरे के विरोध में खड़ा कर सकती है। उन्होंने मंत्री से तमिल भाषा, तमिल माध्यम से पढ़ने वाले विद्यार्थियों, युवाओं के रोजगार, तमिल शोध और उद्यमियों के लिए अवसरों से संबंधित योजनाओं पर भी जवाब मांगा।
वर्ष 1970 में भी उठ चुकी है अलग झंडे की मांग
तमिलनाडु के लिए अलग ध्वज बनाने का मुद्दा नया नहीं है। वर्ष 1970 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि की सरकार ने राज्य के लिए अलग झंडे की अनुमति देने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के सामने रखा था।
उस समय तैयार किए गए डिजाइन में धूसर रंग की पृष्ठभूमि, ऊपरी बाईं ओर भारतीय तिरंगा और मुख्य हिस्से में राज्य के मंदिर के गोपुरम का प्रतीक शामिल था। करुणानिधि ने उस समय तर्क दिया था कि अलग राज्य ध्वज होने से देश की एकता या राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस विषय पर दूसरे मुख्यमंत्रियों से विचार-विमर्श करने की बात कही थी। हालांकि, कुछ नेताओं के विरोध के चलते यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया।
कर्नाटक में भी राज्य ध्वज को लेकर चर्चा
तमिलनाडु में अलग झंडे की मांग ऐसे समय सामने आई है, जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी कन्नड़ ध्वज को आधिकारिक मान्यता देने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि आगामी बेलगावी विधानसभा सत्र के दौरान इस विषय पर चर्चा की जाएगी और इसे मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा।
कर्नाटक में वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार ने भी राज्य के लिए अलग ध्वज का प्रस्ताव तैयार किया था। उस डिजाइन में पीले, सफेद और लाल रंग की क्षैतिज पट्टियां थीं तथा बीच में राज्य का प्रतीक गंडभेरुंड शामिल था। प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था, लेकिन इसे आधिकारिक मान्यता नहीं मिल सकी।

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