सतारा के जिला प्रशासन ने शनिवार को पोर्श दुर्घटना के आरोपी के परिवार के स्वामित्व वाले महाबलेश्वर के एक रिसॉर्ट में कई हिस्से अवैध पाए गए। जिस पर मुख्यमंत्री के आदेश के बाद बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया। वहीं उनका घर और संस्थान सील किया जा चुका है।

सतारा के जिला प्रशासन ने शनिवार को पोर्श दुर्घटना के आरोपी के परिवार के स्वामित्व वाले महाबलेश्वर के एक रिसॉर्ट में कई हिस्से अवैध पाए गए। जिस पर मुख्यमंत्री के आदेश के बाद बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया। वहीं उनका घर और संस्थान सील किया जा चुका है।

19 मई को महाराष्ट्र में हुई दुर्घटना से पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। एक 17 वर्षीय लड़के ने पुणे के कल्याणी नगर इलाके में नशे की हालत में हाइवे पर बाइक में कार से टक्कर मार दी। बाइक पर बैठे दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों ही युवक आईटी पेशे के थे। घटना के समय आरोपी नशे में था। वह 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कार चला रहा था।

बता दें कि 19 मई को ही हादसे के 15 घंटे के भीतर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने मामूली शर्तों के साथ आरोपी को रिहा कर दिया था। आरोपी किशोर को सड़क दुर्घटनाओं पर 300 शब्दों का निबंध लिखने, 15 दिनों तक ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करने और शराब पीने की आदत के लिए काउंसिलिंग लेने को कहा गया था।

इसके बाद पुणे पुलिस ने जुवेनाइल बोर्ड से कहा कि अपराध बेहद गंभीर है, इसलिए नाबालिग आरोपी पर बालिग की तरह कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस बोर्ड के फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट पहुंची थी। कोर्ट ने पुलिस को बोर्ड में रिव्यू पिटीशन देने को कहा। 22 मई को जुवेनाइल बोर्ड ने नाबालिग को एक बार फिर तलब किया और 5 जून तक के लिए बाल सुधार गृह भेज दिया।

इस घटना के बाद किशोर को बचाने के लिए उसके पिता और दादा ने कई प्रयास किया। लेकिन घटना के राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में होने के कारण कोई प्रयास काम नहीं आए। लेकिन किशोर के पिता और दादा को गिरफ्तार कर लिया गया था।

इसके बाद प्रशासन की मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा सतारा कलेक्टर जितेंद्र डूडी को उनकी अवैध सम्पत्ति पर बुलडोजर चलाने के आदेश दिए गए थे। जांच में पाया गया कि महाबलेश्वर के मलकम पेठ इलाके में उनका एमपीजी क्लब में एक अनाधिकृत निर्माण है। अधिकारियों ने बताया कि आदेश के बाद जांच में अवैध निर्माण वाले रिसॉर्ट को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया।

अधिकारी ने बताया कि प्रशासन ने पिछले सप्ताह संस्थान और घर को सील कर दिया था। किशोर के दादा को परिवार के ड्राइवर का अपहरण करने के आरोप में न्यायिक हिरासत में रखा गया है। ड्राइवर का अपहरण किया गया था ताकि उसे पोर्श दुर्घटना का दोष लेने के लिए मजबूर किया जा सके।

किशोर के पिता और मां जांच के हिस्से के रूप में शराब की खपत का परीक्षण करने के लिए एकत्र किए गए रक्त के नमूनों में फेरबदल करने के आरोप में जेल में हैं। उन पर बेटे का ब्लड सैंपल बदलवाने के लिए अपना ब्लड सैंपल देने और डॉक्टरों को पैसे देने का आरोप है।

एक्सीडेंट के बाद नाबालिग के शराब पीने की बात छिपाने के लिए नाबालिग के ब्लड सैंपल को ससून अस्पताल में बदला गया था। आरोपी के ब्लड सैंपल को उसकी मां के सैंपल से बदलने के लिए पिता विशाल अग्रवाल से 50 लाख रुपए की डील हुई थी।

घटना के पहले नाबालिग आरोपी ने बहुत शराब पी थी। इसकी पुष्टि बार में लगे CCTV से हुई थी, लेकिन ब्लड रिपोर्ट एल्कोहॉल निगेटिव आने पर पुलिस को शक हुआ। जांच में पता चला कि सैंपल बदला गया था। ससून अस्पताल के डॉ. तावरे, डॉ. हलनोर और अस्पताल के एक स्टाफ को 27 मई को गिरफ्तार किया गया। मां को 1 मई को गिरफ्तार किया गया।

Azra News

Azra News

Next Story