ठाणे में एक कंटेनर में आग लगने से छह बकड़ियों की मौत हो गई, वहीं एक 35 वर्षीय व्यक्ति की बाल बाल जान बच गई। आग की वजह से तीन वाषिज्यिक गैस सिलेंडर, जेनरेटर, एक मोटरबाइक समेत अन्य कई चीजे जलकर नष्ट हो गई।

महाराष्ट्र के ठाणे में शुक्रवार को एक कंटेनर में आग लग गई, जिसके वज से एक 35 वर्षीय व्यक्ति की बाल-बाल जान बच गई। इस हादसे में छह बकड़ियों की जान चली गई। यह घटना रेटिबंडर क्षेत्र के गणेश विसर्जन घाट के पास रात के दो बजे घटी। आग की वजह से तीन वाषिज्यिक गैस सिलेंडर, जेनरेटर, एक मोटरबाइक समेत अन्य कई चीजे जलकर नष्ट हो गई।

अधिकारी ने बताया कि कंटेनर के भीतर सो रहे निर्मल महतो सही समय पर घटनास्थल से भागने में कामयाब रहे। ठाणे नगर निगम में आपदा प्रबंधन सेल के प्रमुख यासीन तड़वी ने बताया कि दमकल की गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंची और आग को बुझाने में जुट गई। फिलहाल इस हादसे में हुए नुकसान का आकलन नहीं हो पाया है।

मुंबई जाने वाला इंडिगो विमान वापस दिल्ली लौटा

मुंबई जाने वाली इंडिगो का एक विमान शुक्रवार की सुबह दिल्ली वापस लौट आया। दरअसल, विमान में दुर्गंध आने के कारण उसे वापस लौटना पड़ा। विमान 6E 449 उड़ान भरने के कुछ समय बाद ही दिल्ली की इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर वापस लौट आया।

इंडिगो ने ए बयान जारी करते हुए बताया कि विमान में दुर्गंध आने के कारण पायलट ने विमान को वापस दिल्ली की तरफ मोड़ दिया। फिलहाल इस मामले में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। एयरलाइन ने बताया कि यात्रियों के लिए दूसरे विमान का आयोजन किया गया था।

सीएम पटनायक का ओडिशा को सौगात

वरिष्ठ नागरिकों के लिए राज्य सरकार की तरफ से तीर्थ यात्रा योजना के तौर पर ओडिशा के छह जिलों से करीब 960 लोग तिरुपति और वेल्लोर की यात्रा के लिए एक विशेष ट्रेन में सवार हुए।

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने गुरुवार को बरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना (बीएनटीवाईवाई) ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। इस ट्रेन का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन से तिरुपति और वेल्लोर की यात्रा कराना है। बता दें कि 2023-24 के दौरान स्वीकृत बीएनटीवाईवाई तीर्थयात्रा ट्रेन की यह 8वीं यात्रा है।

एक अधिकारी ने बताया कि खुरधा, कटक, पुरी, केंद्रपाड़ा,जगतसिंहपुर और ढेंकनाल जिले से कुल 90 वरीष्ठ नागरिक इस ट्रेन में सवार थे। बरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना का एकमात्र लक्ष्य गरीब वरिष्ठ नागरिकों को तीर्थयात्रा करवाना है। इस योजना के तहत आईआरसीटीसी के साथ मिलकर अबतक 27 यात्राओं का आयोजन किया गया है।

एफएमआर को खत्म करने के केंद्र के फैसले पर मणिपुर के आदिवासियों का विरोध

भारत-म्यांमार मुक्त आवागमन व्यवस्था (एफएमआर) को खत्म करने के केंद्र सरकार के फैसले पर मणिपुर के आदिवासी समूहों के सदस्य ने विरोध जताया है। बता दें कि भारत-म्यांमा सीमा के करीब रहने वाले लोगों को एफएमआर के तहत बिना किसी दस्तावेज के एक-दूसरे के क्षेत्र में 16 किलोमीटर तक भीतर जाने की अनुमति है।

आदिवासी समूहों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर बृहस्पतिवार को प्रतिक्रिया दी है। शाह ने कहा था कि केंद्र सरकार ने देश की आंतरिक सुरक्षा और पूर्वोत्तर राज्यों की जनसांख्यिकीय संरचना को बनाए रखने के लिए यह फैसला किया है।

जो यूनाइटेड’ के प्रवक्ता गिन्जा वुअलजोंग ने कहा, 'मणिपुर और मिजोरम में आदिवासी समुदाय एफएमआर के फैसले से खुश नहीं हैं और वे बड़े स्तर पर निर्णय का विरोध करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।' उन्होंने आगे कहा, 'हमने बुधवार को गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ तीन घंटे तक बैठक की। हमने बैठक के दौरान उन विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जिनका हम अपने देश में सामना कर रहे हैं। उन्होंने हमारे मुद्दों तथा चिंताओं को धैर्यपूर्वक सुना है और कहा है कि वे इसे उच्च अधिकारियों तक पहुंचायेंगे।'

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