लघु सिंचाई विभाग में बड़ा गड़बड़झाला, शिकायत मुख्यमंत्री से
एई-जेई मिलकर मध्यम-गहरी बोरिंग परियोजना में कर रहे बड़ा खेल
मोटे कमीशन के फेर में माखौल बनी महत्वपूर्ण परियोजना, खुलेआम मची लूट
पति-पत्नी और बेटे की फर्मों पर ख़ास मेहरबानी, अन्य पंजीकृत फ़र्मों को दिखाया जा रहा ठेंगा
पिछले साल 700 इस साल है 650 बोरिंगों का लक्ष्य, किसान से जमा कराए जा रहे 71 हज़ार अतिरिक्त
सीएम से कार्यवाही की मांग, जेई अभय गुप्ता है मास्टर माइंड
गहरी बोरिंग में है और बड़े राजदार
एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ फतेहपुर। लघु सिंचाई विभाग की मध्यम-गहरी बोरिंग परियोजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़झाले का मामला उजागर हुआ है। मुख्यमंत्री को भेजे गए एक शिकायतीपत्र में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बताया गया है कि पिछले तीन सालों में सबमर्सिबल पम्प और कालम पाईप सप्लाई पति-पत्नी और बेटे की फर्मों के साथ मिलकर विभागीय जिम्मेदारों ने योजना को “चरने” में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। पिछले लगभग एक दशक से जमे अवर अभियंता अभय गुप्ता को कृषि हित में तुरन्त हटाने और उनके कार्यकाल की जाँच करवाने की मांग की गई है।
उल्लेखनीय है कि कृषि क्षेत्र में अमूल-चूल परिवर्तन लाने की दिशा में शासन द्वारा सिंचन क्षमता बढ़ाने की दिशा में खासा ज़ोर दिया जा रहा है। जिसके क्रम में स्थानीय विकास भवन में स्थित लघु सिंचाई विभाग पर विभिन्न बोरिंग योजनाओं को मूर्त रूप देने की ज़िम्मेदारी है किन्तु यह विभाग किसानों को लाभान्वित कराने के बजाय उनका आर्थिक शोषण कर रहा है, बल्कि सरकारी धन का भी दुरुपयोग किया जा रहा है।
ख़बर है कि पिछले वित्तीय वर्ष (2024-25) में शासन द्वारा उपरोक्त विभाग को मध्यम-गहरी बोरिंग परियोजना के तहत पात्र 700 किसानों के खेतों में बोरिंग करवाकर लाभान्वित करवाने का लक्ष्य दिया गया था, जिसे समय रहते पूर्ण कर लिया गया। इसी तरह मौजूदा वित्तीय वर्ष (2024-25) में फ़िलहाल 650 बोरिंगों का लक्ष्य दिया गया है, जिसे पूर्ण किया जा रहा है। यह भी अनुमान है कि इसमें अभी बढ़ोत्तरी भी हो सकती है। बड़ी बात यह है कि संबंधित विभाग के कर्ता-धर्ता योजना से लाभान्वित कराने के नाम पर किसानों का न सिर्फ़ आर्थिक शोषण कर रहे हैं, बल्कि पंजीकृत कुल दर्जन भर के करीब फ़र्मो में पति-पत्नी और बेटे की तीन (अवस्थी एजेंसी, अवस्थी ब्रदर्स एवं के.एम. कंस्ट्रक्शन) फ़र्मो को अधिकतर बोरिंगे एलाट करने के साथ साथ सबमर्सिबल पम्प और कालम पाईप सप्लाई का काम शत प्रतिशत सौंपा गया है। इतना ही नहीं गलत तरीक़े से उपरोक्त फर्मों को लाभ पहुँचाया गया, बल्कि नियम विरुद्ध ढंग से सिर्फ़ 71 हज़ार रुपए अधिक जमा करवाकर कमीशन का तगड़ा खेल भी खेला गया!
अधिवक्ता अभिषेक सिंह द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायतीपत्र में उपरोक्त गड़बड़झाले का विस्तार से उल्लेख करते हुए जांच कराने की मांग की गई है। बकौल शिकायतीपत्र परियोजना के तहत् लाभार्थी किसान से विभाग में बोरिंग के लिए सिर्फ़ 16500 रुपये ही जमा करवाये जाने चाहिए किन्तु विभाग के सहायक अभियंता शुभम कुमार मिश्रा के साथ मिलकर खिलाड़ी अवर अभियंता अभय गुप्ता द्वारा नब्बे फ़ीसदी से अधिक किसानों से अलग-अलग 87500 रुपये जमा कराए गये हैं, जिसमें 16500 रुपये तो बोरिंग के नाम पर थे किन्तु मोटे कमीशन के उद्देश्य से 71 हज़ार रुपये ज़्यादा जमा करवाये गए, जिसे सामान (सबमर्सिबल पम्प और कालम पाईप सप्लाई ) के लिए बताया गया।
शिकायतीपत्र में बताया गया है कि विभाग ने तगड़ा खेल करते हुए उद्देश्यपूर्ण ढंग से पंजीकृत फ़र्मो में अवस्थी एजेंसी, अवस्थी ब्रदर्स एवं के.एम. कंस्ट्रक्शन से सेटिंग करके अधिकतर बोरिंग के काम के साथ-साथ सबमर्सिबल पम्प और कालम पाईप सप्लाई का काम एक ही परिवार की इन तीन फर्मों को सौप दिया। इतना ही नहीं नियम विरुद्ध ढंग से इन फ़र्मों को बोरिंग के अलावा बोरिंग का सामान आपूर्ति करने की ज़िम्मेदारी भी सौप दी गई, जिसके तहत पहले 16500 रुपये तो बोरिंग के नाम पर, फिर 71 हज़ार रुपये सामान के नाम पर इन फ़र्मों को भुगतान भी कर दिया गया, जिसमें मोटा कमीशन सेट होने की बात कही जा रही है! यह भी आरोप है कि विभाग ने जिस मोटर का भुगतान उपरोक्त फर्मों को 60 से 65 हज़ार और कालम पाईप का लगभग 14 हज़ार रुपये तक भुगतान इन फर्मों को किया गया है, उसकी क़ीमत खुले बाजार में 30 से 35 फ़ीसदी तक कम है।
यह भी आरोप है कि कई किसानों ने दबाव के चलते विभाग में पैसा तो जमा कर दिया किन्तु बाजार में रेट पता करने पर काफ़ी अंतर होने पर बोरिंग के सामान का पैसा वापस मांगा तो पहले विभागीय जिम्मेदारों ने हीला-हवाली की फिर कहीं से भी सामान ख़रीदने की छूट देते हुए कहा कि संबंधित फर्म को सीधे भुगतान कर दिया जाएगा, आरोप है कि ऐसे कई मामले हैं जिसमें किसानों ने सीधे जहाँ से सामान खरीदा, उन फर्मों को एक-डेढ़ साल बाद भी भुगतान नहीं किया गया है, जबकि एक ही परिवा की तीन फ़र्मों को एमआरपी से कहीं ज़्यादा सबमर्सिबल पम्प और कालम पाईप सप्लाई में भुगतान किए जाने की बात कही गई है।
शिकायतीपत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि अवर अभियंता अभय गुप्ता इस पूरे भ्रष्टाचार की मूल कड़ी है, उसके द्वारा सहायक अभियन्ता शुभम कुमार मिश्रा को प्रभाव में लेकर पूरा खेल सजाया जाता रहा है। विभाग के गोदाम से सबमर्सिबल पम्प और कालम पाईप सप्लाई के लिए पति-पत्नी और बेटे की फ़र्मों को बाकायदे पर्ची लिखकर किसानों को दी जाती रही हैं। पंजीकृत कुछ अन्य फ़र्मो से जब उपरोक्त आरोपों के बाबत वार्ता की गई तो दबी जुबान आरोपों की पुष्टि की गई और कहा गया कि जेई अभय गुप्ता इतना कमीशन माँगते हैं कि उसकी पूर्ति कर पाना उनके बस में नहीं है। जो उनकी माँग पूरी करता है, उसी पर मेहरबान रहते हैं।
शिकायतीपत्र में आरोप लगाया गया है कि जिला प्रशासन उपरोक्त गड़बड़झाले के प्रति कतई गंभीर नहीं है। शासन स्तर से जाँच करवाकर योजना का उद्देश्यपूर्ण क्रियान्वयन कराने और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई किए जाने की पुरजोर मांग की गई है।
इस शिकायतीपत्र में गहरी बोरिंग में और ज़्यादा गड़बड़झाले और बड़े राजदारो का विस्तार से उल्लेख किया गया है…!

