रिकॉर्ड रूम में सेंधः साढ़े पांच दर्जन समितियों की फाइलें गायब, बाबू के घर बना समानांतर दफ्तर

      फतेहपुर सहकारिता में वसूली बाबू का डिजिटल सिंडिकेटः दफ्तर से डेटा पार, निजी लैपटॉप से चल रही समानांतर सत्ता
– सरकारी रिकॉर्ड रूम में सेंधः साढ़े पांच दर्जन समितियों की फाइलें गायब, बाबू के घर बना समानांतर दफ्तर
– को-ऑपरेटिव सेल की जांच पर कुंडलीः दागी सचिवों को बचाने के लिए पत्रावलियों का डिजिटल अपहरण
– नियमों को ठेंगे पर रख पुत्र-मोहः सीतापुर में बैक डेट नियुक्ति और जोनिहा ट्रांसफर के खेल से विभाग शर्मसार
– वेतन पर फंसा पेंचः पर्याप्त दस्तावेजों के अभाव में बैंक मैनेजर ने रोका उज्ज्वल सिंह का भुगतान
– संदिग्ध ओबीसी पत्र पर उठे सवालः बिना पर्याप्त साक्ष्यों के कैसे जारी हुआ बैंक का गोपनीय अंतर-शाखा पत्र?
एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ फतेहपुर— जनपद का सहकारिता विभाग इन दिनों एक कर्मचारी के रसूख के आगे नतमस्तक है। संग्रह अनुभाग में तैनात संग्रह सहायक अनिल वर्मा उर्फ वसूली बाबू ने न केवल विभाग की कार्यप्रणाली को हाईजैक कर लिया है, बल्कि कार्यालय की अत्यंत गोपनीय पत्रावलियों को भी गायब कर अपने कब्जे में ले लिया है। आलम यह है कि विभाग का सारा डेटा बाबू के निजी लैपटॉप में कैद है, जिसके चलते पूरा महकमा डिजिटल बंधक बन चुका है।
साढ़े पांच दर्जन बी-पैक्स का रिकॉर्ड लापता- सहकार से समृद्धि योजना के तहत जनपद में गठित साढ़े पांच दर्जन से अधिक नवीन बी-पैक्स (बहुउद्देशीय ग्रामीण सहकारी समितियों) से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज कार्यालय से नदारद हैं। सूत्रों का दावा है कि इन समितियों के गठन और सचिवों की नियुक्ति में हुई व्यापक धांधली को छिपाने के लिए बाबू ने इन फाइलों को अपने आवास पर छिपा रखा है। कार्यालय की अलमारियों से गायब इन फाइलों में दागी सचिवों का कच्चा-चिट्ठा और को-ऑपरेटिव सेल में चल रही वित्तीय अनियमितताओं की जांच के महत्वपूर्ण साक्ष्य शामिल हैं।
पुत्र मोह और वेतन का पेचः बैंक मैनेजर ने दिखाया आईना- वसूली बाबू के भ्रष्टाचार की जड़ें उनके बेटे उज्ज्वल सिंह की विवादित नियुक्ति से जुड़ी हैं। चर्चा है कि पिछले दशक में सीतापुर सोसाइटी में अपने बेटे की नियुक्ति बैक डेट में कराकर सरकारी प्रक्रिया का मखौल उड़ाया गया और फिर रसूख के बल पर जोनिहा सोसाइटी में उसका ट्रांसफर करा लिया गया।
हैरानी की बात यह है कि नियम विरुद्ध हुई इस नियुक्ति के कारण उज्ज्वल सिंह को दोनों ही जगहों पर अब तक वेतन नसीब नहीं हुआ है। अब वसूली बाबू वेतन जारी कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, लेकिन जोनिहा बैंक मैनेजर ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि नियुक्ति के पर्याप्त और वैध दस्तावेजों के बगैर वेतन निर्गत नहीं किया जाएगा।
ओबीसी (इंटर-शाखा पत्र) की विश्वसनीयता पर सवाल- इस मामले में सबसे गंभीर मोड़ ओबीसी को लेकर आया है। बैंक की एक शाखा द्वारा दूसरी शाखा को भेजा जाने वाला यह गोपनीय पत्र उज्ज्वल सिंह के संदर्भ में कैसे और किन आधारों पर जारी कर दिया गया, जबकि उसकी नियुक्ति के मूल दस्तावेज ही संदिग्ध हैं? बिना पर्याप्त साक्ष्यों के जारी हुआ यह पत्र अब खुद जांच के घेरे में है। विभाग और बैंक के जानकार इस ओबीसी की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
तत्कालीन अफसरों का कवच और करोड़ों की उगाही- आरोप है कि तत्कालीन एआरसीएस मोहसिन जमील, राजेश कुमार और प्रयागराज मंडल के तत्कालीन डीआर के संरक्षण में यह पूरा खेल खेला गया। इन्हीं अधिकारियों की मौन सहमति से नई समितियों के गठन में व्यापक अवैध वसूली की गई। वर्तमान में जिला सहकारी बैंक का बोर्ड इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सकते में है और शासन स्तर पर बड़ी कार्रवाई की सिफारिश की तैयारी कर रहा है।
डेटा सुरक्षा पर सवालः बाबू के लैपटॉप में क्यों है सरकारी डेटा?- सबसे बड़ा सवाल यह है कि संवेदनशील और गोपनीय विभागीय डेटा एक बाबू के निजी लैपटॉप में कैसे पहुंच गया? कार्यालय से फाइलों का गायब होना और डेटा का निजीकरण करना सीधा-सीधा ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट का उल्लंघन है। भ्रष्टाचार की शिकायतों के बीच विभाग के वर्तमान अधिकारियों की चुप्पी इस संदेह को और पुख्ता कर रही है कि कहीं इस खेल में उनकी भी मूक सहमति तो नहीं?

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