सिपाही-ठेकेदार बेखौफ आश्वासन में दफन हुई कार्रवाई,बाग में अवैध कटान पर पर्दा

      सोनही के बाग में अवैध कटान पर पर्दा, सिपाही- ठेकेदार बेखौफ आश्वासन में दफन हुई कार्रवाई

एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ फतेहपुर — थाना राधानगर क्षेत्र का हल्का नंबर एक इन दिनों सवालों के घेरे में है। सोनही गांव के किनारे स्थित एक बाग में बीते दिनों खुलेआम लकड़ी कटान का मामला सुर्खियों में आया तो स्थानीय लोगों को लगा कि अब जिम्मेदार जागेंगे और दोषियों पर शिकंजा कसेगा। लेकिन हुआ ठीक उल्टा। खबर सामने आने के बाद हल्के नंबर एक का चर्चित सिपाही पुष्पेंद्र दो दिन का अवकाश लेकर घर चला गया और विभाग ने मानो पूरी कहानी पर चुप्पी की चादर डाल दी। सूत्रों के मुताबिक बिना किसी वैध परमिशन के बाग में चिरवल और नीम के पेड़ काट लिए गए। कटान का काम रात-दिन चलता रहा और आसपास के ग्रामीण तमाशबीन बने रहे क्योंकि उन्हें साफ संदेश था कि इस काम के पीछे वर्दी का संरक्षण है।

मामला जब सार्वजनिक हुआ तो अधिकारियों ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली। लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी न सिपाही पर कोई विभागीय कार्रवाई हुई और न ही कथित अंदौली का ठेकेदार फरीद पर कोई कानूनी शिकंजा कसा गया।सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि घटना के बाद महज छुट्टी लेकर चले जाने से मानो पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया । क्या यह संयोग है या संरक्षण। यदि एक आम व्यक्ति पेड़ काटे तो उसी दिन मुकदमा दर्ज हो जाता है, लेकिन जब वर्दी पर आरोप लगे तो जांच की फाइलें रफ्तार खो देती हैं। यही सवाल अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।ग्रामीणों का कहना है कि बाग में महुआ के पेड़ अभी भी खड़े हैं और डर है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे भी नहीं बचेंगे। लोगों में यह संदेश जा रहा है कि संरक्षण मिलने पर कोई भी व्यक्ति पर्यावरण कानूनों को धता बता सकता है। यही कारण है कि विभागीय चुप्पी लोगों के गुस्से को और बढ़ा रही है।बताया जा रहा है कि सिपाही और ठेकेदार की पत्रकारों से बातचीत का वीडियो भी जल्द सोशल मीडिया पर सामने आ सकता है। यदि ऐसा हुआ तो न केवल स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठेंगे बल्कि विभागीय जवाबदेही भी कटघरे में खड़ी होगी।आज पेड़ कट रहे हैं और कल जंगल खत्म होंगे । लेकिन उससे पहले भरोसा खत्म हो रहा है। कानून पर भरोसा। यदि ऐसे मामलों में भी कार्रवाई सिर्फ आश्वासन तक सीमित रही तो वह दिन दूर नहीं जब पर्यावरण भी मरेगा और व्यवस्था की साख भी। सवाल साफ है,क्या जांच सच में होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन होकर अगले कटान का इंतजार करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *