करोड़ों के समर्पण के बाद भी उपेक्षा के शिकार हुए शिल्पकार,आस्था पर ‘अधर्माचरण’ का साया

      सिद्ध पीठ तांबेश्वर महादेव मंदिर: आस्था के केंद्र पर ‘अधर्माचरण’ का साया, करोड़ों के समर्पण के बाद भी उपेक्षा के शिकार हुए शिल्पकार

“आस्था पर प्रहार: तांबेश्वर मंदिर के जीर्णोद्धार में करोड़ों का खेल, धूल फांक रहा पूर्व मुख्य सचिव का शिलापट्ट!”

“भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी तांबेश्वर महादेव मंदिर की परिसंपत्तियाँ, तत्कालीन सचिव पर 25 लाख की एफडीआर डकारने का आरोप।”

“विज्ञानानंद की प्रेरणा और आलोक रंजन के पसीने का अपमान, तांबेश्वर मंदिर ट्रस्ट में ‘कब्जा’ राज जारी।”

“शिल्पकारों को मिला तिरस्कार: तांबेश्वर मंदिर की भव्यता के पीछे छिपी है गबन और उपेक्षा की कड़वी सच्चाई।”

एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ फतेहपुर— जनपद की आस्था का सर्वोच्च केंद्र, अति प्राचीन ६५ फुट ऊँचा सिद्ध श्री तांबेश्वर महादेव मंदिर, वर्तमान में अपनी भव्यता के पीछे छिपे अपनों के ही छलावे और उदासीनता की अजब कहानी बयां कर रहा है। लगभग डेढ़ दशक पूर्व जिस मंदिर को नई पहचान और स्वरूप देने के लिए करोड़ों का दान समर्पित किया गया, आज उसी की परिसंपत्तियों पर कब्जे और मंदिर निर्माण के सूत्रधारों के अपमान का गंभीर मामला सामने आया है।

विज्ञानानंद की परिकल्पना और आलोक रंजन का पुरुषार्थ मंदिर के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण में ओम घाट भिटौरा के स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती की भूमिका मील का पत्थर मानी जाती है। स्वामी जी की प्रेरणा से ही उनके शिष्य और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने मंदिर को भव्यता प्रदान करने के लिए अपने तंत्र के माध्यम से लगभग सवा करोड़ रुपये का चंदा एकत्र कराया था।

स्थानीय जानकारों के अनुसार निर्माण में लगभग ८० लाख रुपये व्यय हुए। वहीं, आलोक रंजन के एक प्रवासी रिश्तेदार द्वारा विदेश से भेजे गए २० लाख रुपये से मंदिर के समीप एक भव्य सत्संग भवन का निर्माण हुआ।

आस्था की आड़ में ‘अर्थ’ का खेल: २५ लाख की एफडीआर डकारी

इस पुनीत कार्य में भ्रष्टाचार की दीमक लगने की बात भी सामने आ रही है। आरोप है कि चंदे की शेष बची २५ लाख रुपये की राशि को मंदिर ट्रस्ट के तत्कालीन सचिव ओम प्रकाश रस्तोगी ने मंदिर के खाते से अपने व्यक्तिगत खाते में ट्रांसफर कराकर एफडीआर बनवा ली। इस वित्तीय गबन की जानकारी होने पर स्वामी विज्ञानानंद ने कड़ा ऐतराज जताया था। चर्चा है कि उनके एक करीबी शिष्य ने आरटीआई (सूचना का अधिकार) के तहत मंदिर प्रबंधन से खर्च का विस्तृत ब्योरा भी मांगा था, जिसे दबाने का प्रयास किया गया।

ख़बर यह भी है कि जनपद के ख्यातिलब्ध साहित्यकार स्व. धनंजय अवस्थी ने भी एफडीआर प्रकरण को लेकर ओम प्रकाश रस्तोगी और राधेश्याम गुप्ता से मिलकर सख्त ऐतराज जताया था।

योगदान को दरकिनार कर ‘अपमान’ की परिपाटी

हैरानी की बात यह है कि जिस राजस्थानी पत्थर और कारीगरों की व्यवस्था स्वामी विज्ञानानंद ने करवाई थी। अब उन्हीं के प्रति वर्तमान प्रबंधतंत्र ने कृतघ्नता की सारी सीमाएं लांघ दीं। मंदिर परिसर में कहीं भी स्वामी जी के योगदान का उल्लेख तक नहीं है।

इतना ही नहीं स्वामी जी द्वारा पूजा-अर्चना के लिए नियुक्त किए गए दो सिद्ध संतों को भी निर्माण कार्य पूर्ण होते ही अपमानित कर भगा दिया गया, जिससे स्वामी जी को गहरा आघात लगा था।
यही हाल पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के साथ भी हुआ। मंदिर को नई पहचान दिलाने वाले इस व्यक्तित्व का शिलापट्ट पिछले पांच वर्षों से परिसर में धूल फांक रहा है, लेकिन वर्तमान कर्ता-धर्ताओं ने उसे लगवाने की सुध नहीं ली।

ट्रस्ट की राजनीति और कब्जे का खेल

अधिवक्ता अभिषेक सिंह द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र ने इस विवाद को नया मोड़ दे दिया है। पत्र के अनुसार मंदिर निर्माण की देखरेख करने वाले तत्कालीन अध्यक्ष उदयमान सिंह की प्रबल इच्छा थी कि उनके बाद आलोक रंजन ट्रस्ट की कमान संभालें, किंतु उदयमान सिंह के आकस्मिक निधन का लाभ उठाकर ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों ने आलोक रंजन को दरकिनार कर दिया और राधेश्याम गुप्ता को अध्यक्ष बना दिया गया, जो लंबे समय से काबिज हैं।

उपेक्षा और बदहाली का मंजर

वर्तमान में मंदिर की परिसंपत्तियों के रखरखाव के प्रति घोर उदासीनता बरती जा रही है। करोड़ों की लागत से बना यह परिसर अब केवल ट्रस्टियों की राजनीति का अखाड़ा बनकर रह गया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री इस मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराते हैं तो मंदिर की संपत्ति के बंदरबांट और प्रभावशाली लोगों के ‘अघोषित कब्जे’ की बड़ी परतें खुल सकती हैं।

उल्लेखनीय है कि मौजूदा समय में उपरोक्त मंदिर के प्रबंधन में सत्तारूढ़ भाजपा नेताओं की ख़ासी दख़ल है। भाजपा के वयोवृद्ध नेता (पूर्व मंत्री) राधेश्याम गुप्ता ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं, जबकि पूर्व भाजपा ज़िला अध्यक्ष मुखलाल पाल अपने को कार्यवाहक अध्यक्ष बताते हैं। इसके अलावा भाजपा के अयाह-शाह विधायक विकास गुप्ता ट्रस्टियों में शामिल हैं। अन्य पदाधिकारियों में अनिल रस्तोगी व दीपक रस्तोगी पुत्रगण स्व. ओम प्रकाश रस्तोगी, विष्णु स्वरूप रस्तोगी, विजय शंकर रस्तोगी व सुधांशु श्रीवास्तव आदि शामिल हैं।

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