जर्जर सड़क ने रोका गांव का विकास, सेमरहटा आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित

       जर्जर सड़क ने रोका गांव का विकास
सेमरहटा आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित
फोटो परिचय-  सेमरहटा गांव के जर्जर मार्ग का दृश्य।
एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ फतेहपुर। तेलियानी विकास खंड क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत हाजीपुर गंग के सेमरहटा की हालत आज भी बदहाल बनी हुई है। सेमरहटा के पुरवा मंदिर चौराहे से लेकर नहर पुल होते हुए झलहा गांव तक जाने वाली सड़क बीते दो दशकों से अधिक समय से जर्जर अवस्था में पड़ी है। यह सड़क लगभग 20-21 वर्ष पूर्व तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख रामसजीवन कोरी के कार्यकाल में खड़ंजा के रूप में बनवाई गई थी। करीब तीन पंचवर्षीय पहले तत्कालीन ग्राम प्रधान राजेंद्र प्रसाद उर्फ पुत्तीलाल के कार्यकाल में खड़ंजे पर कुछ उलटफेर तो किया गया, लेकिन इसके बाद से आज तक सड़क की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हो सका। नतीजतन यह मार्ग आज भी ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। ग्रामीणों की समस्या को लेकर बीते अप्रैल माह में पत्रकार सोहनलाल के नेतृत्व में क्षेत्रीय ग्रामीणों ने विधायक कुमार जैकी को शिकायती पत्र सौंपकर सड़क की दयनीय स्थिति से अवगत कराया था। विधायक ने मामले का संज्ञान लेते हुए विभागीय जेई अमर सिंह को डाक बंगले में बुलाकर सड़क का प्रस्ताव तैयार कराने के निर्देश दिए थे। जेई अमर सिंह ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि सड़क का प्रस्ताव भेज दिया गया है और अप्रैल माह तक आगे की कार्रवाई की जाएगी, धरातल पर कोई कार्य न दिखने से ग्रामीणों में खलबली मची है की आखिर क्या यह बात भी अंधर में रह जाएगी। कहावत है कि जब अंधे को आँख मिलती है, तब ही रास्ता दिखता है, लेकिन सेमरहटा क्षेत्र के लोग आज भी इसी इंतजार में हैं। हालांकि पिछले दशक के बाद कई सड़कों पर सुधार तो हुआ पर कुछ आज भी अंधेरे में हैं वहीं देखा जाय हाजीपुर गंग ग्राम सभा के अंतर्गत आने वाले सेमरहटा, सेमरहटा का पुरवा, झलहा, हाजीपुर गंग गड़रियन पुरवा सहित कई गांव आज भी अत्यंत पिछड़े हुए हैं। जर्जर सड़क संपर्क मार्गों के कारण इन गांवों का विकास अवरुद्ध है। स्थिति यह है कि बच्चों को स्कूल जाने के लिए सुरक्षित और सुगम मार्ग तक उपलब्ध नहीं है। युवाओं के लिए न तो खेलकूद मैदान है, न जिम या व्यायामशाला, जिससे वे सेना या पुलिस भर्ती जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें। गांव में बहन-बेटियों की शादी के लिए बारात शाला तक नहीं है। आंगनबाड़ी केंद्र की हालत भी दयनीय है। सेमरहटा गांव में करीब 26 वर्ष पूर्व बना एकमात्र आंगनबाड़ी केंद्र पूरी तरह जर्जर हो चुका है, जिससे आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को बच्चों और गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण के लिए इधर-उधर कैंप लगाकर काम चलाना पड़ता है। ग्रामीणों में ननकू, बाबूलाल, कंधई, बच्चू, श्रीराम आदि लोगों का कहना है कि जर्जर सड़क ही सबसे बड़ा कारण है, जिसके चलते विकास कार्यों और अधिकारियों का गांव में आवागमन नहीं हो पाता। यही वजह है कि आज भी सेमरहटा क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से कटा हुआ है और यहां के बच्चों का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र सड़क निर्माण कराकर क्षेत्र के विकास का मार्ग खोलने की मांग की है।

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