जनपद न्यायाधीश ने जिला कारागार का किया त्रैमासिक निरीक्षण
जनपद न्यायाधीश ने जिला कारागार का किया त्रैमासिक निरीक्षण
जनपद न्यायाधीश ने जिला कारागार का किया त्रैमासिक निरीक्षण
दीपक धुरिया अजरा न्यूज़ जालौन उरई — उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार माननीय जनपद न्यायाधीश विरजेन्द्र कुमार सिंह ने मंगलवार को जिला कारागार उरई का त्रैमासिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न बैरकों का भ्रमण किया तथा वहां निरुद्ध बंदियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को जाना और समझा। साथ ही जेल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
निरीक्षण के समय जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक खरे, पुलिस अधीक्षक डॉ० दुर्गेश कुमार, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शाम्भवी, प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी वीरेन्द्र कुमार सहित जेल प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान माननीय जनपद न्यायाधीश ने बंदियों के मुकदमों की पैरवी, उन्हें प्रदान की जा रही विधिक सहायता और महिला बंदियों तथा उनके साथ रह रहे बच्चों के उपचार एवं भोजन की व्यवस्था के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कई बंदियों से अलग-अलग बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और जेल प्रशासन को निर्देशित किया कि जिन बंदियों के पास निजी अधिवक्ता नहीं हैं अथवा जिनकी न्यायालय में विधिवत पैरवी नहीं हो पा रही है, उन्हें विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी विचाराधीन बंदी को सरकारी व्यय पर अधिवक्ता की आवश्यकता हो तो संबंधित न्यायालय में उसकी ओर से प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कराया जाए, जिससे न्यायमित्र की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। इसी प्रकार जिन बंदियों को दोषसिद्ध घोषित किया जा चुका है और जिनकी अपील नहीं हो पाई है, उनके लिए नियमानुसार जेल अपील कराई जाए। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से आवश्यक समन्वय बनाकर प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, जिससे अपील की समय-सीमा समाप्त न होने पाए।
जिला कारागार में स्थित चिकित्सालय का भी निरीक्षण किया गया। इस दौरान दवाओं की जांच की गई, जिसमें सभी दवाएं संतोषजनक पाई गईं।
माननीय जनपद न्यायाधीश ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि जिन विचाराधीन बंदियों की जमानत सक्षम न्यायालय से स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन जमानतदार के अभाव में उनकी रिहाई नहीं हो पा रही है, ऐसे बंदियों की सूची तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनकी रिहाई सुनिश्चित की जा सके।