ऐतिहासिक श्री बराही देवी मेला : हिंदू–मुस्लिम एकता की मिसाल, आस्था और संस्कृति का संगम

  ऐतिहासिक श्री बराही देवी मेला : हिंदू–मुस्लिम एकता की मिसाल, आस्था और संस्कृति का संगम

दीपक धुरिया अजरा न्यूज़ जालौन– जिले के लेना रोड स्थित फौजी पड़ाव क्षेत्र में लगने वाला श्री बराही देवी मेला न सिर्फ एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह हिंदू–मुस्लिम एकता का जीवंत प्रतीक भी माना जाता है। इस पावन स्थल पर एक ओर सैयद पीर बाबा की मजार स्थित है, तो वहीं पास ही देविका देवी जी का मंदिर है। यहां वर्षों से हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग समान श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं, देवी मंदिर में माथा टेकते हैं और पीर बाबा की मजार पर चादर चढ़ाकर अमन-चैन की दुआ मांगते हैं।
यह मेला हर साल अपने भव्य स्वरूप और सामाजिक सौहार्द के कारण दूर-दूर तक पहचान बनाए हुए है। मेले में धार्मिक आस्था के साथ-साथ ग्रामीण संस्कृति और लोक परंपराओं की भी सुंदर झलक देखने को मिलती है।
झूले, बाजार और मनोरंजन का केंद्र
मेले में बच्चों और युवाओं के लिए आकर्षक झूले, मनोरंजन के कई साधन, जादू-टोना व करतबों के खेल लोगों का खास आकर्षण रहते हैं। वहीं, गृहस्थी में काम आने वाला रोजमर्रा का सामान सस्ते दामों पर उपलब्ध होने के कारण आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए मेले में पहुंचते हैं। बर्तन, कपड़े, खिलौने, सजावटी सामान और ग्रामीण जरूरतों की वस्तुओं से पूरा मेला गुलजार रहता है।
खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन
मेले की रौनक को और बढ़ाते हैं यहां आयोजित होने वाले कबड्डी, कुश्ती, वॉलीबॉल सहित अन्य खेल प्रतियोगिताएं। इन प्रतियोगिताओं में दूर-दूर से खिलाड़ी आकर अपना दमखम दिखाते हैं। खेल प्रेमियों के लिए यह मेला किसी उत्सव से कम नहीं होता, जहां रोमांचक मुकाबलों का आनंद लिया जाता है।
रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम
दिनभर की चहल-पहल के बाद रात में मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। लोकगीत, लोकनृत्य और अन्य प्रस्तुतियां दर्शकों को देर रात तक बांधे रखती हैं। ग्रामीण कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलता है।
आसपास के गांवों से उमड़ती है भीड़
इस ऐतिहासिक मेले में लोना, छानी, कुवरपुरा, नारायणपुरा, खर्रा, हरकोती, गायर, हरक्का, मॉडरी, शहजादपुरा, अकोढ़ी, भिटारा, सुढार, सालावाद, सिकरी राजा, तावा, हथेरी, कुंदनपुरा, देवरी, कियामदी, सारंगपुर, प्रतापपुरा, शेखपुरा, हदरुख, हरदोई राजा, गूढ़ा, कुसमरा, गढ़गवा सहित अनेक गांवों के लोग परिवार सहित पहुंचते हैं और मेले का भरपूर आनंद लेते हैं।
देशभर में है पहचान
श्री बराही देवी मेला केवल स्थानीय आयोजन नहीं, बल्कि इसकी पहचान देशभर में है। यह मेला वर्षों से भाईचारे, आपसी सद्भाव और सांस्कृतिक एकता का संदेश देता आ रहा है। यहां आकर यह एहसास होता है कि आस्था और इंसानियत जब साथ चलती हैं, तो समाज में सच्ची एकता की मिसाल कायम होती है।
कुल मिलाकर, जालौन का श्री बराही देवी मेला धार्मिक सौहार्द, सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण जीवन की खुशियों का भव्य उत्सव है, जो हर साल लोगों के दिलों में खास जगह बना लेता है।

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