साइकिलों पर निकला आक्रोश, सांकेतिक सत्याग्रह शुरू, उपस्थिति के विरोध में भड़के सचिव

        ऑनलाइन उपस्थिति के विरोध में भड़के सचिव
साइकिलों पर निकला आक्रोश, सांकेतिक सत्याग्रह शुरू
फोटो परिचय- साइकिल पर सवार होकर आक्रोश जताता सचिव।
एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ फतेहपुर। ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर सचिव संवर्ग का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। एक दिसंबर से लागू की गई ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली (एफआरएस आधारित जियो-फेंस्ड एआई-एमएल प्लेटफॉर्म) और मूल विभागीय दायित्वों से इतर लगातार थोपे जा रहे अतिरिक्त कार्यों के विरोध में प्रदेशभर में क्रमिक व सांकेतिक सत्याग्रह की शुरुआत कर दी गई है।
बताया गया कि शासन ने तीन नवंबर को जारी आदेश में सचिवों पर पंचायत सहायक/अकाउंटेंट-कम-डाटा एंट्री ऑपरेटर जैसी ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया था। डीपीआरओ आगरा द्वारा एफआरएस आधारित अटेंडेंस की पीपीटी तक जारी कर दी गई, जबकि विभागीय स्तर से अभी तक जिलों को कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। वहीं कई जनपदों में बीडीओ और अधिकारी बिना संसाधन उपलब्ध कराए ही सचिवों पर ऑनलाइन उपस्थिति, रोस्टर और औपचारिकताएं पूरी कराने का दबाव बना रहे हैं। ग्राम पंचायत अधिकारी संघ, ग्राम विकास अधिकारी संघ व राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने 10, 11 व 14 नवंबर को शासन को पत्र भेजकर तकनीकी, व्यवहारिक व भौतिक विसंगतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए इस प्रणाली को तत्काल स्थगित करने की मांग की थी, लेकिन शासन की ओर से किसी भी पत्र का संज्ञान अब तक नहीं लिया गया है। अतिरिक्त कार्यभार, दबाव और भय के माहौल में सचिव संवर्ग मानसिक तनाव से गुजर रहा है। संगठन का आरोप है कि विभागीय जिम्मेदारियों के साथ जबरन थोपे गए अतिरिक्त कार्य और अनिवार्य ऑनलाइन उपस्थिति सचिवों को अवसाद में धकेल रहे हैं। सचिव संवर्ग के भीतर रोष तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। जिले के विभिन्न मार्गों से दर्जनों ग्राम सचिव साइकिलों पर ब्लॉक परिसर पहुंचे। जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि प्रादेशिक संगठन के निर्देश पर प्रदेशव्यापी सांकेतिक आंदोलन चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सचिवों को मिलने वाला यात्रा भत्ता वर्षों पुराना और वर्तमान परिस्थितियों में अत्यंत अपर्याप्त है। फील्ड कार्य, गांव-गांव भ्रमण और विकास योजनाओं की निगरानी की अपेक्षा की जाती है, तो भत्तों और संसाधनों में भी न्यायसंगत वृद्धि होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार साइकिल का भत्ता दे रही है, इसलिए सचिव अब गांव के कार्यों से लेकर कार्यालय पहुंचने तक साइकिल का ही उपयोग करेंगे।

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