रमज़ान मुबारक हर मोमिन पर फर्ज,जो तुमसे पहले की कौमों पर फर्ज किया गया,,,

        रमज़ान मुबारक हर मोमिन पर फर्ज,,, जो तुमसे पहले की कौमों पर फर्ज किया गया,,

   वरिष्ठ समीक्षक व पत्रकार “फ़ज़रूर रहमान”, पूर्व प्रवक्ता एमआईसी फतेहपुर
एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ — इस्लामी महीना रमजान मुबारक अपने पूरे शबाब पर है आज नावां रोजा हो गया है जो ईद उल फितर के मौके पर समाप्त होगा
इस पाक महीने में मुस्लिम समाज के लोग सुबह सूरज निकलने से पहले से और शाम सूरज ढलने तक कुछ भी नही खाते पीते हे और पूरा दिन इबादत में मसरूफ रहते है शाम को सूरज ढलने के बाद किसी मीठी खजूर या पानी से रोज़ा खोलते है,
रोज़े का मतलब होता है तकवे का अपनी हर बुरे कामों से अपने को रोकना ,अच्छे कामों को ज्यादा से ज्यादा करना अपने अन्य कार्यों के साथ इबादत करना


नियत साफ रखना झूट फरेब मक्कारी से बचना , ईमानदारी ज़िमेदारी और वफादारी के साथ मुल्क समाज के लिए काम करना
इस माह में हर साहिबे निसाब को अपने साल गुजरने के बाद जमा धनराशि ,या साढ़े बावन तोला चांदी,या साढ़े सात तोला सोना के बराबर धनराशि का ढाई परसेंट जकात (टैक्स) के रूप में पहले अपने गरीब भाई बहन , नाते रिश्तेदार, पास पड़ोस के गरीब लोग, लड़कियों की शादी बीमार के इलाज और गरीब छात्रों की पढ़ाई में दान के रूप देना होता है ऐसा करना ईद त्यौहार आने से पहले खर्च करना होता है
इस एक महीने में हम एक आदर्श समाज का निर्माण कर सकते एक दूसरे के दुख दर्द में शरीक को कर ,
अच्छे अखलाक से, भाई चारे का माहोल बना कर , बुजर्गो की मां बाप की सेवा करे

तभी हमारी इबादत सार्थक होगी और इस एक महीने की कठिन तपस्या साल भर तक हमारे जीवन में खुश हाली लगाएगी
तो आइए दिलो से नफरत को खत्म करे मोहब्बत कोआम करे, हम देश समाज के लिए उपयोगी बने ,इस महीने कुछ कुछ जगह पर सुबह सहरी के वक्त जगाने के लिए माइक में ज़ोर ज़ोर कव्वाली, नात की रिकॉर्डिंग लगा देते हैं इससे हमारे पड़ोसियों को कष्ट होता है बीमार एवम विद्यार्थियों को पढ़ाई में व्यवधान उत्पन्न होता है अतः ऐसा ना करें
हमारी इबादत हमारे कामों से सब का कल्याण हो मंगल हो यही रमज़ान का पैगाम है

वरिष्ठ समीक्षक व पत्रकार “फ़ज़रूर रहमान”, पूर्व प्रवक्ता एमआईसी फतेहपुर

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