सत्तर के दशक में थीं 49  संपत्तियां, अब अस्तित्व तलाश रही महादेव की विरासत

     महादेव की संपत्ति पर अपनों की मायाः  तांबेश्वर मंदिर ट्रस्ट में परिवारवाद और भ्रष्टाचार का गहराया साया
सत्तर के दशक में थीं 49  संपत्तियां, अब अस्तित्व तलाश रही महादेव की विरासत
– ट्रस्ट की आड़ में परिवारवाद का फंदाः वर्षों से बंद पड़े बैंक खाते और अपनों को बचाने की चुप्पी
– दादा उदयमान सिंह की विरासत संभालने को सुरभि रंजन के नाम की गूँज, विज्ञानानंद सरस्वती को भी शामिल करने की मांग
एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ फतेहपुर– आस्था और विश्वास का केंद्र सिद्ध श्री तांबेश्वर महादेव मंदिर इन दिनों भक्ति के कारण नहीं, बल्कि प्रबंधतंत्र की संदिग्ध कार्यप्रणाली और करोड़ों के वित्तीय हेरफेर के कारण चर्चा में है। मंदिर का वैभव और उसकी विरासत श्अपनोंश् के स्वार्थ की बलि चढ़ती दिख रही है। सत्तर के दशक में जिस मंदिर के पास 49 अचल संपत्तियां थीं, आज उसके प्रबंधकों की गंभीरता का आलम यह है कि महादेव की अधिकांश संपत्तियां खुर्द-बुर्द कर दी गई हैं।
परिवारवाद की बेड़ियों में जकड़ा ट्रस्ट, खुली बैठक अब इतिहास- मंदिर प्रबंधतंत्र पर परिवारवाद के हावी होने के आरोप अब सार्वजनिक हो चुके हैं। नियमानुसार ट्रस्ट की गतिविधियों की जानकारी भक्तों और समाज को देने के लिए खुली बैठक का प्रावधान है, लेकिन वर्षों से कोई बैठक न होना प्रबंधकों की मंशा पर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि ट्रस्ट को एक निजी पारिवारिक जागीर की तरह चलाया जा रहा है, जहां पारदर्शिता का कोई स्थान नहीं है।
तीन-चार बैंक खाते और संदिग्ध मौनः सवा करोड़ की एफडीआर का रहस्य- ट्रस्ट के वित्तीय दस्तावेजों की पड़ताल एक भयावह तस्वीर पेश करती है। ट्रस्ट के नाम पर संचालित तीन-चार बैंक खातों में वर्षों से कोई लेनदेन नहीं हुआ है। सबसे बड़ा विवाद डेढ़ दशक पूर्व का है, जब तत्कालीन सचिव ओम प्रकाश रस्तोगी द्वारा ट्रस्ट के खाते से 25 लाख रुपये अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर एफडीआर बनवा ली गई थी। चक्रवृद्धि ब्याज के साथ आज यह रकम लगभग सवा करोड़ रुपये हो चुकी है, लेकिन मौजूदा ट्रस्टी और स्थानीय प्रशासन इस रकम की मंदिर के खाते में वापसी को लेकर रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए हैं।
कायाकल्प के लिए सुरभि रंजन और स्वामी विज्ञानानंद की उठने लगी मांग- इस अंधकारमय माहौल में मंदिर के गौरवशाली अतीत को पुनः जीवित करने की मांग तेज हो गई है। श्रद्धालुओं और प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि मंदिर का कायाकल्प करने वाले दादा उदयमान सिंह की बेटी सुरभि रंजन (पत्नी आलोक रंजन, पूर्व मुख्य सचिव, उ.प्र.) को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए। उनकी प्रशासनिक सूझबूझ और मंदिर से पारिवारिक जुड़ाव को देखते हुए यह मांग पुरजोर तरीके से उठ रही है। साथ ही, स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती को प्रबंधतंत्र में शामिल करने की आवश्यकता जताई जा रही है ताकि मंदिर की आध्यात्मिक और भौतिक गरिमा को पुनः स्थापित किया जा सके।
अतीत की 49 संपत्तियांः कौन डकार गया महादेव का हिस्सा?- रिकॉर्ड्स बताते हैं कि सत्तर के दशक में महादेव की परिसंपत्तियों की संख्या 49 थी। आज इनमें से अधिकांश पर अवैध कब्जे हो चुके हैं या उन्हें चर लिया गया है। मौजूदा प्रबंधतंत्र न तो इन संपत्तियों को बचाने में गंभीर है और न ही भू-माफियाओं के खिलाफ कोई कार्रवाई कर रहा है। प्रशासन की अनदेखी ने इन सफ़ेदपोश कब्जाधारकों के हौसले बुलंद कर दिए हैं।
मुख्य सवालः जिनका जवाब मांग रहा शहर- डिजिटल युग में सन्नाटाः ट्रस्ट के बैंक खातों में वर्षों से लेनदेन क्यों नहीं हुआ? एफडीआर का सचः सवा करोड़ की भारी-भरकम रकम मंदिर के बजाय निजी स्वार्थ की भेंट क्यों चढ़ी है? गोपनीयता का खेलरू आखिर क्यों ट्रस्ट की खुली बैठक बुलाने से बच रहे हैं जिम्मेदार?
अदृश्य संपत्तियां- क्या प्रशासन महादेव की बची-खुची संपत्तियों के सीमांकन की हिम्मत जुटाएगा?- सिद्ध पीठ तांबेश्वर महादेव मंदिर केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि फतेहपुर की आत्मा है। यदि समय रहते परिवारवाद के इस मकड़जाल को काटकर एक पारदर्शी और योग्य नेतृत्व (जैसे सुरभि रंजन और स्वामी विज्ञानानंद) को कमान नहीं सौंपी गई, तो आने वाली पीढ़ियां इस महान विरासत को केवल इतिहास की किताबों में ही देख पाएंगी।

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