सत्याग्रही प्रवीण पांडेय की हालत बिगड़ने से बढ़ा गुस्सा

सत्याग्रही प्रवीण पांडेय की हालत बिगड़ने से बढ़ा गुस्सा

- क्षेत्रीय लोगों ने अनशन स्थल पर पहुंचकर जाना हालचाल

व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष व पदाधिकारियों ने बढ़ाया उत्साह

फोटो परिचय- (6) सत्याग्रह में बैठे समिति के पदाधिकारी व अन्य।

मो. ज़र्रेयाब खान अजरा न्यूज़ खागा/फतेहपुर। हसवा विकास खंड के नरैनी चौराहे पर विजयीपुर-गाजीपुर मार्ग के लिए चल रहे सत्याग्रह में चौथे दिन सत्याग्रही प्रवीण पांडेय की हालत खराब हो गई। रात में भी दो बार ब्लड प्रेशर को लेकर समस्या हुई थी। सुबह से दस्त की समस्या बढ़ी तो स्थानीय डाक्टर को बुलाकर दिखाया गया। एक-दूसरे के माध्यम से यह बात क्षेत्र के लोगों को पता चली तो तमाम लोग अनशन स्थल पर पहुंच गए।

व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष शिवचंद्र शुक्ला, अखिल भारत वर्षीय यादव महासभा के जिलाध्यक्ष चौधरी राजेश यादव, मिशन मोदी के जिलाध्यक्ष अवधेश मिश्रा, व्यापारी नेता अमिताभ शुक्ला व अनुपम शुक्ला आदि लोगों ने नरैनी चौराहा पहुंचकर सत्याग्रहियों का हालचाल लिया। व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष ने कहा कि क्षेत्र के सैकड़ों गांवों, लाखों लोगों की समस्या का निराकरण मांग रहे सत्याग्रहियों से वार्ता के लिए शासन-प्रशासन में बैठे लोगों को आगे आना चाहिए। सड़क निर्माण आरंभ होने का संकल्प है। उसे हर हाल में पूरा कराया जाना चाहिए। उधर सत्याग्रही प्रवीण पांडेय ने कहा ग्राम पंचायत, नगर पंचायत तथा पालिकाओं में तमाम विकास योजनाओं का बिना प्रस्ताव क्रियान्वयन होता है। केंद्र और प्रदेश में हमारी सरकार है। सरकार के कामकाज को हम भलिभांति समझते हैं। उसके बाद भी 34 किलोमीटर लंबाई वाले विजयीपुर-गाजीपुर सड़क का निर्माण कराने में बार-बार अधिकारी बजट और शासन की स्वीकृति का हवाला देकर लोगों को धोखा देते आ रहे हैं। प्रवीण पांडेय ने कहा कि कार्यकर्ता होने के नाते मेरी भी जिम्मेदारी बनती है कि सड़क निर्माण के लिए जो भी मुझसे, मेरे साथियों से हो सकता है योगदान दूं। जब तक सड़क निर्माण नहीं शुरू होता है, सत्याग्रह जारी रहेगा। जल और जन आशीर्वाद के सहारे हमारा अनशन जारी है। कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि को पांच वर्ष का समय मिलता है। दूसरा कार्यकाल चल रहा है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि मूलभूत आवश्यकता की सड़क तक हीं बना सके हैं। केवल कागजों में सड़क की योजना दौड़ा रहे हैं। इससे बड़ी विडंबना क्षेत्र के लिए क्या हो सकती है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के बताए एकात्म मानवदर्शन में अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के विकास की बात मंच से करने वालों को सड़क की बदहाली नहीं दिखाई देती है।

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