चीन यात्रा से लौटे मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत से कहा है कि वह 15 मार्च तक मालदीव में तैनात अपने सैन्यकर्मियों को वापस बुलाए। 2023 मालदीव आम चुनाव के दौरान मुइज्जू की पार्टी का चुनावी वादा था कि अगर चुनाव में जीते तो भारतीय सैनिकों को मालदीव छोड़कर जाने को कहा जाएगा।

भारत और मालदीव के बीच जारी कूटनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। हालिया घटनाक्रम में द्वीपीय राष्ट्र की सरकार ने अपने देश से भारतीय सैनिकों को वापस भेजने की समयसीमा तय कर दी है। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जु ने भारत से कहा है कि 15 मार्च तक वह अपने सैनिकों को हटा ले। यह बयान उन्होंने चीन दौरे के बाद दिया है, जिसके वे समर्थक माने जाते हैं।

आइए जानते हैं कि भारतीय सैनिकों की मौजूदगी को लेकर मालदीव ने क्या निर्णय लिया है? भारत ने कैसे प्रतिक्रिया दी है? आखिर द्वीप राष्ट्र में हमारे कितने सैनिक हैं? ये सैनिक वहां क्या कर रहे हैं? मालदीव हमारी सेना को क्यों हटा रहा है?

भारतीय सैनिकों की वापसी को लेकर मालदीव ने क्या निर्णय लिया है?

हाल ही में चीन की यात्रा करके आए मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू सख्त तेवर दिखा रहे हैं। मुइज्जू ने भारत से कहा है कि वह 15 मार्च तक मालदीव में तैनात अपने सैन्यकर्मियों को वापस बुलाए। सार्वजनिक नीति सचिव अब्दुल्ला नाजिम ने राष्ट्रपति कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राष्ट्रपति ने भारतीय सैनिकों को मार्च से पहले वापस जाने के लिए कहा है।


इस बीच, भारतीय सैनिकों की वापसी पर चर्चा के लिए दोनों देशों ने एक उच्चस्तरीय कोर समूह बनाया है। समूह ने रविवार सुबह विदेश मंत्रालय में एक बैठक की, जिसमें मालदीव में भारतीय राजदूत मुनु महावर भी शामिल हुए। नाजिम ने कहा कि राष्ट्रपति ने इस साल 15 मार्च से पहले मालदीव से भारतीय सैनिकों की वापसी को रविवार की बैठक के एजेंडे के रूप में लिया और शाम तक चर्चा जारी रही।

भारत ने कैसे प्रतिक्रिया दी है?

दुबई में COP28 शिखर सम्मेलन के मौके पर भारतीय सैनिकों की वापसी पर एक उच्चस्तरीय समूह का गठन किया गया था। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मालदीव के राष्ट्रपति की मुलाकात के बाद लिया गया था। वहीं, दोनों देशों में जारी तनाव के बीच विदेश मंत्रालय (एमईए) ने रविवार को सैनिकों के मसले पर बयान जारी किया है।

मंत्रालय ने बताया कि उच्च स्तरीय कोर समूह की पहली बैठक में दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने और चल रही परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने पर चर्चा की। बैठक में भारतीय विमानों और हेलीकॉप्टरों के संचालन को जारी रखने के लिए व्यावहारिक समाधान ढूंढने पर भी चर्चा की गई। इस बैठक के बाद मालदीव के विदेश मंत्रालय के हवाले से स्थानीय अखबार ने लिखा कि भारत सैनिकों की वापसी में तेजी लाने पर सहमत हुआ है।

नाजिम ने कहा, 'भारतीय सैनिक मालदीव में नहीं रह सकते। यही राष्ट्रपति डॉ. मुइज्जू की नीति है, यही सरकार की नीति है।' भारतीय सैनिकों की वापसी पर फिलहाल विदेश मंत्रालय में चर्चा चल रही है। गौरतलब है कि राष्ट्रपति मुइज्जू पिछले हफ्ते अपनी पहली चीन यात्रा के बाद कल मलय लौटे और परोक्ष रूप से भारत पर मौखिक हमले किए।

द्वीप राष्ट्र में हमारे कितने सैनिक हैं और वे क्या कर रहे हैं?

मालदीव से जिन भारतीय सैनिकों को वापस भेजने की बात की जा रही है, मालदीव के अखबार के अनुसार उनकी संख्या महज 88 है। मालदीव के लोगों की सेवा के लिए भारत ने मालदीव को डोर्नियर 228 समुद्री गश्ती विमान और दो एचएएल ध्रुव हेलीकॉप्टर दे रखे हैं। इन्हें संचालित करने के लिए वहां भारतीय सैनिक तैनात हैं। इसके अलावा ये सैनिक डॉक्टर के तौर पर लोगों की सेवा करने के साथ-साथ वहां के पायलटों को ट्रेनिंग देते हैं और एक्सक्लूसिव इकॉनामिक जोन का सर्वे जैसे काम भी करते हैं।


मालदीव हमारी सेना को क्यों हटा रहा है?

पिछले साल सितंबर में मालदीव में हुए आम चुनाव के दौरान मुइज्जू की पार्टी ने भारतीय सैनिकों को हटाने के लिए चुनाव में 'इंडिया आउट' अभियान चलाया था। मुइज्जू ने चुनाव में 'इंडिया आउट' लिखी टी शर्ट पहन कर चुनाव प्रचार किया था।

उनका चुनावी वादा था कि अगर चुनाव में जीते तो भारतीय सैनिकों को मालदीव छोड़कर जाने को कहा जाएगा। चीन समर्थक मुइज्जू ने राष्ट्रपति का पदभार संभालने के दूसरे दिन ही आधिकारिक तौर पर भारत सरकार से अपने सैनिकों को वापस बुलाने का अनुरोध किया।

वहीं हालिया चीन दौरे के बाद मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के तेवर सख्त हो गए हैं। इससे पहले उन्होंने भारत का नाम लिए बिना कहा था कि किसी देश के पास मालदीव को धमकाने का अधिकार नहीं है।

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