प्रसाद खाने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ी, खाद्य विभाग ने भरे सैंपल

      उरई के रामनगर में ‘टिंकू पेड़ा’ पर सवाल
प्रसाद खाने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ी, खाद्य विभाग ने भरे सैंपल
दीपक धुरिया अजरा न्यूज़ जालौन– उरई शहर के रामनगर मोहल्ले में प्रसाद के रूप में बांटे गए पेड़ों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद बच्चों और युवाओं में वितरित किए गए पेड़े खाने के कुछ ही घंटों में कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने की शिकायत सामने आई। परिजनों के मुताबिक बच्चों को उल्टी-दस्त होने लगे, जिसके बाद उन्हें तत्काल मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। बुधवार तक कुछ बच्चों के उपचाराधीन होने की जानकारी मिली है।
घटना मंगलवार की बताई जा रही है। रामनगर स्थित मंदिर में आयोजित पूजा के बाद प्रसाद के लिए मशहूर “टिंकू पेड़ा” की दुकान से पेड़े मंगवाए गए थे। आरोप है कि प्रसाद ग्रहण करने के बाद बच्चों की हालत बिगड़ गई। शिकायतें बढ़ते ही इलाके में हड़कंप मच गया और लोगों में नाराजगी देखी गई।


सूचना मिलते ही पुलिस और खाद्य विभाग हरकत में आ गया। सिटी सीओ राजीव कुमार शर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। खाद्य विभाग की टीम ने दुकान पर पहुंचकर पेड़ों के नमूने भर लिए। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी विनोद कुमार राय ने बताया कि शिकायत के आधार पर सैंपलिंग की गई है और लैब रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यदि जांच में लापरवाही या मिलावट पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मामले में तीन पक्ष सामने आए हैं।
पहला पक्ष उस युवक का है जिसने मंदिर में पूजा कराई और प्रसाद के लिए पेड़े मंगवाए थे। उसका आरोप है कि पेड़े खराब थे, जिससे बच्चों की तबीयत बिगड़ी।
दूसरा पक्ष दुकान संचालक का है, जिन्होंने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनकी दुकान की वर्षों पुरानी प्रतिष्ठा है और वे निष्पक्ष जांच के पक्षधर हैं। उनका कहना है कि पेड़े पूरी गुणवत्ता के साथ बनाए गए थे।
तीसरा पक्ष बच्चों और उनके परिजनों का है, जिन्होंने आशंका जताई है कि या तो पेड़ों में कोई गड़बड़ी थी या वितरण के दौरान कुछ मिलावट हुई हो सकती है।


फिलहाल मामला जांच के घेरे में है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ रही है और खाद्य विभाग की लैब रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने पारदर्शी जांच की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो सके।
अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने की असली वजह पेड़ों की गुणवत्ता थी या कोई अन्य

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