ये उत्सव है या, होलिका दहन नारी के ऊपर अत्याचार की विचारधारा को पुष्ट करता

       ओम् नरायन पटेल सवांददाता अज़रा न्यूज़ फतेहपुर– होली का त्यौहार इस देश के मूलनिवासियों के साथ किए गए छल, अत्याचार का उत्सव है, ये ऐतिहासिक सच है ऐसा लेखकों ने लिखा,,,,,,,,आप में से कई मानसिक गुलाम इस सत्य को एक सिरे से खारिज कर देंगे,,,,,,,,लेकिन हिरण्यकश्यप, प्रह्लाद, होलिका को वरदान आदि पौराणिक गप्प पर बिना किसी तथ्य के भरोसा कर लेंगे,,,,,,,
छोड़िए इतिहास को चलिए वर्तमान में तार्किक तौर पर होली के उत्सव की समीक्षा करते हैं,,,,,,

 होलिका के रूप में नारी को जिंदा जलाना,,,,,क्या पुरुषवादी समाज के द्वारा सती प्रथा के रूप में नारी को जिंदा जलाने की याद ताज़ा नहीं करता,,,,क्या आज भी नारी को जिंदा जलाने की घटनाएं सुनाई नहीं देती,,,,होलिका दहन नारी के ऊपर अत्याचार की विचारधारा को पुष्ट करता है। ये उत्सव है।
जिस देश में वृक्षों का आवरण लगातार घट रहा हो वहां करोड़ों टन लकड़ी का जलाना एवं पॉल्यूशन को बढ़ाना उत्सव है। जिस देश में गरीब जनता पानी को तरस जाती है वहां करोड़ों लीटर जल नाहक बर्बाद कर देना उत्सव है।भांग, गांजा, शराब आदि नशे को बढ़ावा देना(कई लोग होली के नाम पर ही पहली बार नशे की गिरफ्त में आते हैं फिर आदि बन जाते हैं) भरपूर नशा करना और बेशर्मों की तरह कहना “बुरा न मानो होली है” ये उत्सव है।नशे के बाद झगड़ों में कई हिंसक वारदातें होती हैं क्या यह उत्सव है।होली के नाम पर पुरुषों को बहन,बेटियों को हाथ लगाने की छूट मिलना और कहना बुरा न मानो होली है क्या ये उत्सव है।होली के दिन इमरजेंसी में यदि परिवार के साथ बाइक या पैदल यात्रा करनी हो तो रास्ते में नशे में धुत अराजक तत्वों के साए के डर में सहमा रहना उत्सव है।दूसरों पर अनिच्छा के बावजूद पेंट, कीचड़ आदि उछालना और चिल्लाना बुरा न मानो होली है यही उत्सव है।
होली के अगले दिन हजारों लोग आंखों और त्वचा की समस्याओं को लेकर अस्पताल में नजर आते हैं ये उत्सव है।नशे में ड्राइविंग कई लोगों की जान ले लेती है , कई घायल होते हैं, ये उत्सव है।दिल में बैर रखकर दिखावे के लिए गले मिलने की मक्कारी उत्सव है। मनुवाद ने मानसिक गुलामी का ऐसा आवरण डाला है कि अनैतिकता को उत्सव के रूप में परोस दिया।

उत्सव का मतलब है,,,

लोगों में प्रेम बढ़े।
लोगों ने लगाव बढ़े।
नारी को सम्मान और अधिकार मिले।
प्रकृति का संरक्षण हो।
सभी लोग स्वेच्छा से शामिल हों।
यातायात सुगम हो।
स्वास्थ्य को नुकसान न हो।
नशे का तिरस्कार हो।
शोषित वंचित वर्ग के उत्थान का कार्य हो
दूसरे के चेहरे पर हंसी और संतोष लाना उत्सव है।
अंधविश्वास पाखंड को दूर कर लोगो को तार्किक बनाना,विकास की ओर ले जाना उत्सव है।

“रोज मनाइए उत्सव किसने रोका है,,

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