बिना ‘एनओसी’ के चल रहे ‘मेडिकल कॉलेज’ ‘जिला अस्पताल’ और ‘सरकारी दफ्तर’
बिना ‘एनओसी’ के चल रहे ‘मेडिकल कॉलेज’ ‘जिला अस्पताल’ और ‘सरकारी दफ्तर’
बिना ‘एनओसी’ के चल रहे ‘मेडिकल कॉलेज’ ‘जिला अस्पताल’ और ‘सरकारी दफ्तर’ आग के लिए मरीज,तीमारदार और अफसरों की छतें सुरक्षित नहीं! सरकारी कार्यालयों सहित अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेज ने आग के मानकों को नहीं किया पूरा! जिले में मनमानी तरीके से पास किये जा रहे इमारतों के नक्शे! अग्निशमन के मानकों की उड़ाई जा रही धज्जियां! असंवेदनशीलता इतनी की बेसमेंट में चल रहे मानकविहीन नर्सिंग होंम! जिम्मेदारों को गड़बड़ी से मुंह मोड़ने के लिए हर महीने दी जाती रकम! जिले की मुखिया की ईमानदारी की निधि को मिट्टी में मिला रहे भ्रष्टाचारी! एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़– लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में जिस आग की घटना से आम आदमी सिहर गया और प्रशासनिक हल्के में मानकों की बहस छिड़ गई उन्हीं मानकों की अनदेखी करने वाले अफसर बंद लिफाफों के लालच में मनमानी की खुली छूट दे देते हैं।फतेहपुर भी इससे अछूता नहीं है।पहले बिल्डिंगों के नक्शों के पास करने और फिर अग्निशमन के मानकों के साथ खिलवाड़ यहां आम बात हो गई है। बेसमेंट सहित बहुमंजिला इमारतों में होटल,रेस्टोरेंट,नर्सिंग होम एवं अन्य प्रतिष्ठान मानकों की धज्जियां उड़ाकर खुलेआम संचालित हो रहे हैं और तो और जिस आग को लेकर अब शासन-प्रशासन संजीदा हुआ है उसी आग के मानकों को जिले के सरकारी कार्यालयों,जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज तक में पूरा नहीं किया गया है।
30 लाख से अधिक की आबादी वाले जिले में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि लोगों के काम बिना दाम दिए नहीं हो रहे हैं। जहां से मानव जीवन को खतरा उत्पन्न हो सकता है वहां तक संवेदनशीलता नहीं बरती जा रही है।इसी का नतीजा है कि मनमाने तरीके से व्यवसायिक इमारतों के नक्शे पास किया जा रहे हैं।बेसमेंट से लेकर हर मंजिल तक के फिक्स दामों ने भवन स्वामियों को मनमानी करने की छूट दे रखी है। एक के बाद एक शहर के पाॅस इलाके में बहुमंजिला इमारतें खड़ी होती चली गई और इनमें मानकों को दरकिनार कर प्रतिष्ठान खुलते रहे। बिल्डिंग बाइलाज सहित अग्निशमन के मानकों को घूस की रकम अदा कर अनदेखा किया जाता रहा और जिम्मेदार मौन साधे रहे। इसके लिए निर्धारित नजराने की रकम अदा की जाती है। जिले में 400 से अधिक नर्सिंग होम एवं पाली क्लीनिक छोटी-छोटी जगहों में संचालित हैं। दर्जनों की संख्या में नर्सिंग होमों को प्राथमिक संसाधनों के बगैर ही बेसमेंट में चला कर मरीजों एवं तीमारदारों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है।
यह सब तब है जब जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स अवैध नर्सिंग होमों को लेकर सख्त रूख में हैं।उनकी ईमानदार छवि को भी भ्रष्टाचारी बट्टा लगा रहे हैं। लखनऊ की आग की घटना ने नए तरीके से शासन स्तर से फरमान जारी किए गए हैं लेकिन इनका पालन करेगा कौन?और करवाइएगा कौन?ये सवाल इसलिए बड़ा है क्योंकि जिन आग की घटनाओं से निपटने के लिए सरकारी अफसरों को जिम्मेदारी दी गई है उन्हीं की छतें आग को लेकर सुरक्षित नहीं है।कलेक्ट्रेट,विकास भवन,जिला अस्पताल,मेडिकल कॉलेज सहित सरकारी भवनों,सरकारी अस्पतालों,शिक्षण संस्थानों के पास अब तक फायर की एनओसी है ही नहीं। इन दफ्तरों में नाम के लिए अग्निशमन के कुछ यंत्रों को लगाकर खानापूरी की गई है। अब जब इस तरह से मनमानी सरकारी मोहकमें से होकर चलेगी तो फिर मनमानी के लिए अभ्यस्त लोगों के क्या कहनें?