जनशक्ति ग्रुप,नेटवर्क मार्केटिंग के जरिए करोड़ों की ठगी के शिकार हो रहे लोग

  नेटवर्क’ मार्केटिंग के जरिए ‘करोड़ों’ की ‘ठगी’ के ‘शिकार’ हो ‘रहे लोग’
👉जनशक्ति ग्रुप ने जिले में फैलाया अपना बड़ा जाल!
👉जनपद ही नहीं आस-पास के लोगों की लग रही भीड़!
👉जोड़ने से शुरू खेल में फंस रहे लोगों को दिखा रहे बड़े सपने!
👉बड़ी गाड़ी,बड़ा घर का सपना कामकाजी महिलाओं तक को लाया खींच!
👉बाउंसर लेकर चलते डायरेक्टर,मोबाइल बाहर रखवा होती मीटिंग!
👉फतेहपुर सहित कानपुर,कौशांबी प्रयागराज एवं अन्य जिलों में बताते हैं अपनी जमीनें!
👉न जमीनों के कागजातों का पता न लेआउट का और न ही ग्रुप के पंजीकरण का!
👉ठगी के हो रहे बड़े खेल से प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी अनजान!


एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज– भले ही पुलिस साइबर अपराधों की रोकथाम को लेकर लोगों में जागरूकता पैदा कर ठगी के शिकार लोगों को न्याय दिला रही हो लेकिन यहां तो नए तरीके से लोगों को ठगने का लंबे समय से खेल शुरू है।नेटवर्क मार्केटिंग के जरिए गाड़ी,बंगला और वह सब कुछ देने का सपना दिखा रहे कर्ताधर्ता लोगों की गाढ़ी कमाई का पैसा यूं ही उड़ाए जा रहे हैं। गुप-चुप तरीके से चल रहे नेटवर्क मार्केटिंग के इस खेल में फतेहपुर जिले के ही नहीं आस-पास के जनपदों के लोगों तक इनके तार जुड़ गए हैं।


शहर के जीटी रोड दिल्ली दरबार के समीप खोले गए जनशक्ति ग्रुप के दफ्तर में नेटवर्क मार्केटिंग का ही खेल खेला जा रहा है। जिला सहित कानपुर नगर,उन्नाव,बांदा,कौशांबी जिलों के लोगों को प्लाट और कमीशन के बड़े लालच देकर उनसे पैसों की ठगी की जा रही है।अपने नीचे दो लोगों को जोड़कर बोनस और फिर जुड़े दो लोग और दो लोगों को जोड़कर एक के बाद एक बन रही चेन इतनी लंबी हो गई है कि इसका खेल सजा चुके लोग बड़ी-बड़ी गाड़ियों में चलने लगे हैं। सूट,बूट और टाई से सजे-धजे लोग बड़े घर,बड़ी लग्जरी गाड़ी व बड़ा आदमी बनने का सपना उनके खेल में शामिल होने के लिए काफी है।
खेल जमीन का खेला जा रहा है,जमीन के किसी टुकड़े को दिखाकर दूसरी जगहों और अन्य जिलों में प्रॉपर्टी होने की बात कर रहे जिम्मेदार उन्हें सपने तो बड़े-बड़े दिखा रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।नेटवर्क मार्केटिंग के इस खेल में घरेलू कामकाजी महिलाएं एक के बाद एक जुड़ रही हैं।चूल्हा-चौका से हटकर आत्मनिर्भर बनने कि उनकी ख्वाहिश ठगी की ओर ले जा रही है। जमीन की प्रॉपर्टी के न तो कागजातों का पता है न जमीन के ले-आउट का और न हीं जनशक्ति ग्रुप के पंजीकरण का लेकिन होने वाली इनकी बैठकों में कानपुर,उन्नाव से आने वाले अधिकारी बने मालिकों तक पहुंचना नेटवर्क से जुड़े लोगों के भी वश की बात नहीं है।
बाउंसरों के साथ चलने वाले मालिक बंद कमरे में ग्रुप की तब मीटिंग लेते हैं जब उन्हें अपने मोबाइल फोन बाहर रखने होते हैं।जूते,चप्पल उतार कर मालिक के सामने सपनों का वही ताना-बाना बुना जाता है जो किसी भी सहज व्यक्ति को आकर्षित करने के लिए काफी हो। कानपुर से राजीव सिंह चौहान और उनके एक पार्टनर के भी इसमें शामिल होना बताया जा रहा है।दोनों कब आएंगे यह जुड़े लोगों को ही पता नहीं रहता।कई बार मांगने के बावजूद ग्रुप के डायरेक्ट अपने कागजात नहीं दिखा पाए।एक शिकायत के बाद सदर तहसीलदार ने भी सारे पत्रजातों के साथ उन्हें तलब किया लेकिन उन्होंने कंपनी से संबंधित कागजात दिखाना मुनासिब नहीं समझा जबकि नेटवर्क मार्केटिंग से नए लोगों को जोड़कर करोड़ों की ठगी का खेल बदस्तूर जारी है।अब देखना यह है कि बड़ी फाइनेंस कंपनियों की तरह ही यहां से इनका बोरा-बिस्तर कब बंधता है?प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी फंसे लोगों को नेटवर्क मार्केटिंग के चंगुल से निकाल पाते हैं या नहीं!

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