नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में गरीबी उन्मूलन की दिशा में हुई प्रगति को देश की एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। विश्व बैंक (World Bank) की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश में अत्यधिक गरीबी में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है, जिससे देश के करोड़ों नागरिकों के लिए विकास के नए अवसर पैदा हुए हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार के लिए ‘गरीबी हटाओ’ महज एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि एक दृढ़ प्रतिबद्धता रही है।
खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
• ऐतिहासिक गिरावट: विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अत्यधिक गरीबी दर 2011 के 27.1% से घटकर 2023 में महज 2.6% रह गई है।
• करोड़ों को मिली राहत: इस अवधि के दौरान देश के लगभग 49.6 करोड़ (496 मिलियन) लोग गरीबी के जाल से बाहर निकले हैं।
• पीएम का संदेश: प्रधानमंत्री मोदी ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए रिपोर्ट साझा करते हुए इसे ‘अवसरों में पीढ़ीगत वृद्धि’ करार दिया।
• बहुआयामी प्रगति: रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने पिछले एक दशक में आर्थिक और गैर-आर्थिक, दोनों पैमानों पर गरीबी घटाने में उल्लेखनीय सफलता पाई है।
‘गरीबी हटाओ’ सिर्फ नारा नहीं, हमारी प्रतिबद्धता: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर विश्व बैंक की इस रिपोर्ट के निष्कर्षों को साझा किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “गरीबी में ऐतिहासिक गिरावट, अवसरों में पीढ़ीगत वृद्धि।”
इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों को संदेश देते हुए कहा कि दशकों से देश में चल रहा ‘गरीबी हटाओ’ का संकल्प उनकी सरकार के लिए कभी सिर्फ नारा नहीं रहा, बल्कि इसे जमीन पर उतारने के लिए नीतियों और योजनाओं के माध्यम से एक मिशन की तरह काम किया गया है।
क्या कहती है विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट?
विश्व बैंक द्वारा जारी ‘इंडिया पावर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ’ (India Poverty and Equity Brief) रिपोर्ट में भारत के पिछले एक दशक के आर्थिक सुधारों और कल्याणकारी योजनाओं की सराहना की गई है।
• आकलन का पैमाना: विश्व बैंक ने इस रिपोर्ट में अत्यधिक गरीबी के आकलन के लिए प्रतिदिन 3 डॉलर और निम्न-मध्यम आय वर्ग की गरीबी के लिए 4.20 डॉलर की सीमा तय की है।
• क्रय शक्ति समता (PPP): ये सभी आंकड़े 2021 की क्रय शक्ति समता (Purchasing Power Parity) पर आधारित हैं।
वैश्विक संस्था का मानना है कि भारत सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल वित्तीय समावेशन (जैसे जनधन, यूपीआई) और सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में मदद पहुंचाने (DBT) जैसी नीतियों के कारण इतनी बड़ी आबादी को गरीबी से बाहर निकालने में मदद मिली है।
