नई दिल्ली। क्रिकेट के मैदान पर आमतौर पर शांत स्वभाव के नजर आने वाले महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का गुस्सा भी एक बार सातवें आसमान पर पहुंच गया था। यह घटना वर्ष 1997 में बारबाडोस में भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए टेस्ट मैच की है। इस मुकाबले में भारतीय टीम महज 81 रन पर सिमट गई थी। शर्मनाक हार के बाद ड्रेसिंग रूम में ऐसा माहौल बना कि खिलाड़ियों के बीच नाराजगी खुलकर सामने आ गई।
120 रन का लक्ष्य भी हासिल नहीं कर सकी थी टीम इंडिया
बारबाडोस टेस्ट में भारतीय टीम को जीत के लिए केवल 120 रन बनाने थे। लक्ष्य छोटा होने के बावजूद भारतीय बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई और पूरी टीम दूसरी पारी में 81 रन पर ऑलआउट हो गई। वेस्टइंडीज ने यह मुकाबला 38 रन से जीत लिया।
इस हार ने भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के साथ-साथ टीम के खिलाड़ियों को भी निराश कर दिया था। किसी को उम्मीद नहीं थी कि जीत के इतने करीब पहुंचने के बावजूद भारतीय टीम इस तरह मुकाबला गंवा देगी।
ड्रेसिंग रूम में फेंकी गईं बोतलें
इस शर्मनाक हार के बाद भारतीय ड्रेसिंग रूम का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, सचिन तेंदुलकर भी अपना आपा खो बैठे थे। खिलाड़ियों के बीच गुस्सा और नाराजगी इस कदर बढ़ गई कि ड्रेसिंग रूम में बोतलें फेंके जाने और वरिष्ठ खिलाड़ियों पर सवाल उठाए जाने की नौबत आ गई।
इस घटना ने टीम के भीतर चल रहे असंतोष को उजागर कर दिया था। खिलाड़ियों को समझ नहीं आ रहा था कि इतना आसान लक्ष्य होने के बावजूद टीम जीत से कैसे दूर रह गई।
भारतीय क्रिकेट के लिए यादगार हार
बारबाडोस टेस्ट की यह हार भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे निराशाजनक पराजयों में गिनी जाती है। उस समय सचिन तेंदुलकर भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे थे। इस मुकाबले ने टीम की बल्लेबाजी कमजोरियों और दबाव में प्रदर्शन करने की समस्याओं को सामने ला दिया था।
क्रिकेट प्रशंसकों के लिए यह मुकाबला आज भी इसलिए याद किया जाता है, क्योंकि भारतीय टीम को जीत के लिए केवल 120 रन चाहिए थे, लेकिन पूरी टीम 81 रन पर ढेर हो गई थी।
