धनुष भंग व परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने मोहा मन
– पटेलनगर में रामलीला महोत्सव का समापन
फोटो परिचय- परशुराम-लक्ष्मण संवाद का दृश्य। एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ फतेहपुर– शहर के पटेलनगर में दो दिवसीय भव्य रामलीला महोत्सव का आयोजन किया गया। अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश महामंत्री मनोज त्रिवेदी के मार्गदर्शन में आयोजित महोत्सव में अभिनेताओं ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। तेरह मार्च से शुरू हुए दो दिवसीय कार्यक्रम में प्रभु श्री राम के जीवन के आदर्शों और पौराणिक प्रसंगों को जीवंत किया। जिसे देखने के लिए भारी संख्या में क्षेत्रीय लोग उमड़े।
महोत्सव के पहले दिन लंका कांड के विभिन्न प्रसंगों का मंचन हुआ। कलाकारों ने माता सीता की खोज, श्री राम और सुग्रीव की मित्रता, बाली वध और हनुमान जी द्वारा लंका दहन की सुंदर प्रस्तुति दी। मंचन के दौरान दर्शकों ने भक्ति रस का आनंद लिया और जय श्री राम के उद्घोष से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा। दूसरे दिन शुरू हुई लीला अपराह्न 11 बजे तक चली। महाराज जनक द्वारा अर्चन-पूजन, श्री राम-लक्ष्मण द्वारा संध्या वंदन और रावण-बाण संवाद का मंचन किया गया। सबसे महत्वपूर्ण प्रसंग अजगव खंडन (शिव धनुष भंग) रहा, जिसके बाद सीता-राम विवाह संपन्न हुआ। इस अवसर पर लक्ष्मण और परशुराम के बीच हुआ तीखा और ज्ञानवर्धक संवाद दर्शकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। संवाद के दौरान अभिनेता आनंद अवस्थी (लक्ष्मण) ने जनेऊ धारण करने के शास्त्रीय नियमों को समझाते हुए कहा कि ब्राह्मण को कुश, क्षत्रिय को सूत और वैश्य को ऊन का यज्ञोपवीत धारण करना चाहिए। वहीं परशुराम के पात्र ने समाज को संदेश दिया कि ईश्वर जन्म-मृत्यु के चक्र से परे है; वे केवल लीला हेतु प्रकट और अंतर्ध्यान होते हैं। मंचन में परशुराम द्वारा सहस्त्रबाहु मर्दन और कामदेव भस्म करने के प्रसंगों को भी बखूबी दर्शाया गया। लक्ष्मण ने भगवान परशुराम की आयु 60 हज़ार 700 वर्ष बताई। आयोजन में रामदत्त शुक्ला (राम), आनंद अवस्थी (लक्ष्मण), रामबाबू द्विवेदी मयंक (परशुराम) और ओम प्रकाश त्रिपाठी (जनक) ने अपनी सशक्त भूमिका निभाई। संगीत पक्ष में सुशील सिंह, दीनदयाल, कमलाकांत और विमल सिंह ने सहयोग दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में नगर पालिका अध्यक्ष राजकुमार मौर्य, समाजसेवी अशोक तपस्वी, अनुराग मिश्रा, पुत्तन बाजपेई, वरिष्ठ भाजपा नेता राजा सिंह कछवाह सहित अभिलाष चंद्र त्रिवेदी एडवोकेट, शिवकांत तिवारी और अन्य कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा।