जजरहा नाले की बदहाल निकासी से हजारों बीघे धान की फसल जलमग्न
जजरहा नाले की बदहाल निकासी से हजारों बीघे धान की फसल जलमग्न
जजरहा नाले की बदहाल निकासी से हजारों बीघे धान की फसल जलमग्न
– पूर्व डीआईजी ने किया निरीक्षण, प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग
फोटो परिचय- जलमग्न धान की फसल दिखाते पूर्व डीआईजी। एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज फतेहपुर। बारिश व बाढ़ के बाद जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से जिले के कमलापुर, म्योली, बरौंहा, धनसिंहपुर, मर्दनपुर, कठवारा, हथेमा और बड़ागांव सहित आसपास के गांवों में हजारों बीघे धान की फसल जलमग्न है। खेतों में पानी भरा होने से किसानों को फसल बर्बाद होने की चिंता सता रही है। सपा नेता एवं पूर्व डीआईजी रामतीर्थ परमहंस ने अपने गांव धनसिंहपुर पहुंचकर प्रभावित किसानों की समस्या सुनी और बड़ागांव होते हुए जजरहा व घघौरा क्षेत्र में जलनिकासी के प्रमुख माध्यम जजरहा नाले का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि नाले की निकासी व्यवस्था दुरुस्त न होने से जलभराव की समस्या बार-बार पैदा हो रही है। समय रहते पानी नहीं निकला तो धान की फसल को नुकसान होने के साथ रबी की बुवाई भी प्रभावित होगी। रामतीर्थ परमहंस ने कहा कि नाले की स्थिति देखने से स्पष्ट होता है कि जलनिकासी की व्यवस्था प्राकृतिक ढलान के अनुरूप विकसित नहीं की गई। अलग-अलग स्थानों पर छोटे-छोटे काम तो कराए गए, लेकिन पूरे क्षेत्र का तकनीकी सर्वे कराकर समग्र योजना नहीं बनाई गई। उन्होंने कहा कि किसान हर साल जलभराव की समस्या से जूझते हैं, लेकिन स्थायी समाधान न होने से उन्हें लगातार नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने वर्ष 1970 की बाढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि वह बचपन से क्षेत्र में बाढ़ और जलभराव की स्थिति देखते आ रहे हैं। उस समय भी ग्रामीण श्रमदान से नाले की सफाई और खुदाई में सहयोग करते थे। हाल ही में बड़ागांव और धनसिंहपुर के ग्रामीणों ने पुलियों से जलकुंभी निकालने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जेसीबी और पोकलेन जैसी मशीनें उपलब्ध हैं, इसलिए तकनीकी सर्वे और योजनाबद्ध कार्य से समस्या का स्थायी समाधान संभव है। पूर्व डीआईजी ने जिलाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण विभाग और सिंचाई विभाग से जजरहा नाले का तकनीकी सर्वे कराने, आवश्यक सफाई व खुदाई कराने व पर्याप्त बजट उपलब्ध कराकर जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की। उन्होंने अयाह शाह विधायक और सांसद से भी किसानों की समस्या को जिला स्तर की बैठकों में उठाने की अपील की, ताकि प्रभावित गांवों के किसानों को राहत मिल सके और उनकी फसलों को बर्बाद होने से बचाया जा सके।