बारिश में ढहा स्कूल का प्रधानाचार्य कक्ष, मासूमों की जिंदगी खतरे में

   बारिश में ढहा स्कूल का प्रधानाचार्य कक्ष, मासूमों की जिंदगी खतरे में
1970 में बना भवन आज बना बच्चों की जान का दुश्मन
फोटो परिचय-  प्राथमिक विद्यालय अल्लीपुर भादर का भवन।
एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज खागा, फतेहपुर। सुल्तानपुर घोष थाना क्षेत्र के ऐरायां विकास खंड के अल्लीपुर भादर प्रथम प्राथमिक विद्यालय में बारिश ने सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। वर्षों पुराने और जर्जर विद्यालय भवन का प्रधानाचार्य कक्ष बारिश के दौरान भरभराकर ढह गया। गनीमत रही कि घटना के वक्त कमरे में कोई बच्चा या शिक्षक मौजूद नहीं था, वरना तस्वीर बेहद भयावह हो सकते थे।
विद्यालय में 119 बच्चे पढ़ते हैं और स्कूल के तीन अन्य कमरे भी जर्जर हालत में बताए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ एक कमरे के गिरने का नहीं, बल्कि उन 119 मासूमों छात्रों की सुरक्षा का है, जो प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि लगातार बारिश के चलते भवन की छत में पानी भरने से प्लास्टर कमजोर होकर गिरने लगा और देखते ही देखते प्रधानाचार्य कक्ष की छत व दीवारें धराशायी हो गईं। हादसे के बाद विद्यालय में मौजूद शिक्षकों और बच्चों में भी चिंता का माहौल है। विद्यालय के प्रधानाचार्य रमेश चंद्र सोनकर ने फोन पर बताया कि विद्यालय भवन का निर्माण वर्ष 1970 में हुआ था। भवन काफी समय से जर्जर है और इसकी स्थिति को लेकर संबंधित विभाग को पूर्व में कई बार लिखित शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद समय रहते न तो भवन की मरम्मत कराई गई और न ही बच्चों के लिए कोई सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की गई। प्रधानाचार्य के मुताबिक अब बारिश में कार्यालय का कमरा पूरी तरह गिर चुका है, जबकि विद्यालय के तीन अन्य कमरे भी जर्जर हैं।
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जर्जर कमरों में बैठकर पढ़ रहे बच्चे
सहायक अध्यापक संदीप गुप्ता ने बताया कि विद्यालय में उपलब्ध जर्जर कमरों में ही बच्चों की पढ़ाई करानी पड़ रही है। सुरक्षित कमरों की कमी के कारण शिक्षक भी मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि करीब तीन माह पूर्व जर्जर भवन को नियमानुसार पंचायत प्रधान की ओर से नीलामी के लिए आदेश दिए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन अभी तक नीलामी की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
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कमरा गिर गया, फिर भी नहीं चेता प्रशासन
प्रधानाचार्य कक्ष के ढहने की घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन अब भी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? जब विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी विभागीय अधिकारियों को पहले से थी और लिखित शिकायतें भी दी जा चुकी थीं, तो आखिर बच्चों की सुरक्षा के लिए समय रहते कदम क्यों नहीं उठाया गया? आज एक कमरा गिरा है, कल अगर दूसरा कमरा बच्चों के ऊपर गिर गया तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? 119 बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा यह मामला महज विद्यालय प्रशासन का नहीं, बल्कि संबंधित शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की जवाबदेही से भी जुड़ा है।

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