जांच की आहट से सहमे झोलाछाप, अतर्रा से लेकर बांदा शहर तक कई क्लीनिकों पर लटके ताले

  जांच की आहट से सहमे कथित झोलाछाप डॉक्टर, अतर्रा से लेकर बांदा शहर तक कई क्लीनिकों पर लटके ताले, पत्रकारों की शिकायत पर डीएम ने गठित की उच्चस्तरीय जांच कमेटी, अब डिग्री और रजिस्ट्रेशन की होगी पड़ताल

संवाददाता सुरेंद्र धुरिया अज़रा न्यूज़ बांदा। जनपद में बिना मान्यता और जरूरी चिकित्सकीय योग्यता के संचालित हो रहे कथित क्लीनिकों के खिलाफ अब कार्रवाई की आहट सुनाई देने लगी है। पत्रकारों द्वारा जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से शिकायत किए जाने के बाद कथित झोलाछाप डॉक्टरों में हड़कंप मचा हुआ है। शनिवार को इसका असर जिले के कई कस्बों और शहरी इलाकों में देखने को मिला। अतर्रा से लेकर नरैनी, बिसंडा, चिल्ला और बांदा शहर तक कई क्लीनिकों के शटर बंद नजर आए।

जानकारी के मुताबिक, अकेले अतर्रा कस्बे में करीब 20 लगभग क्लीनिक बंद रहने की चर्चा रही। वहीं नरैनी, बिसंडा, चिल्ला के अलावा बांदा शहर के कालूकुआं और चमरौड़ी क्षेत्रों में भी कई कथित क्लीनिक संचालकों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। हालांकि कुछ स्थानों पर पिछले दरवाजे से चोरी-छिपे मरीजों को देखने की चर्चाएं भी सामने आई हैं। इससे सवाल उठता है कि क्या इन क्लीनिकों का संचालन केवल जांच और कार्रवाई के डर से कुछ समय के लिए रोका गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है। वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने भी शिकायतों पर जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया है। अब स्वास्थ्य विभाग की टीम क्लीनिक संचालकों की शैक्षिक योग्यता, चिकित्सकीय डिग्री, पंजीकरण और उपचार संबंधी पात्रता की जांच करेगी। जांच में नियमों का उल्लंघन मिलने पर क्लीनिक सील करने से लेकर एफआईआर दर्ज कराने तक की कार्रवाई की जा सकती है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से ऐसे आरोप भी सामने आ रहे हैं कि कुछ कथित क्लीनिक संचालक दूसरे चिकित्सकों की डिग्री और नाम का इस्तेमाल कर मरीजों का उपचार कर रहे हैं। आरोप है कि कुछ स्थानों पर ऑपरेशन, प्रसव और गर्भपात जैसी गंभीर चिकित्सकीय प्रक्रियाएं भी कराई जा रही हैं। बबेरू क्षेत्र में भी इस तरह की गतिविधियों को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। बिना पर्याप्त योग्यता और जरूरी चिकित्सकीय सुविधाओं के मरीजों को ड्रिप चढ़ाने से लेकर गंभीर बीमारियों का उपचार किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग पूर्व में भी शिकायतों के आधार पर कई क्लीनिकों को सील कर चुका है। इसके बावजूद ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में बिना मान्यता के चिकित्सा सेवाएं संचालित होने की शिकायतें लगातार उठती रही हैं। ऐसे में इस बार पत्रकारों की शिकायत के बाद गठित जांच कमेटी की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेगी या फिर धरातल पर उतरकर प्रत्येक संदिग्ध क्लीनिक की पड़ताल होगी? क्या दूसरे चिकित्सकों की डिग्री और नाम का कथित दुरुपयोग करने वालों की पहचान होगी? फिलहाल जिले की निगाहें जांच कमेटी और स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। निष्पक्ष जांच और प्रभावी कार्रवाई से ही अवैध चिकित्सा गतिविधियों पर अंकुश लग सकेगा और मरीजों की जिंदगी के साथ होने वाले कथित खिलवाड़ को रोका जा सकेगा।

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