रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। शनिवार को रामपुर जेल से जमानत पर रिहा होने के महज 15 मिनट के भीतर ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया। ईडी की 16 सदस्यीय टीम गाजियाबाद की विशेष अदालत से जारी गिरफ्तारी वारंट लेकर रामपुर पहुंची थी। यह कार्रवाई वर्ष 2019 में आजम खान के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज किए गए एक मामले (ECIR) के सिलसिले में की गई है।
खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
• 15 मिनट की आजादी: दो पैनकार्ड मामले में जमानत मिलने के बाद शाम 6:57 बजे जेल से छूटे, लेकिन 7:12 बजे ईडी उन्हें साथ ले गई।
• पैरामिलिट्री फोर्स के साथ धावा: ईडी की टीम शनिवार शाम 4 बजे ही 4 गाड़ियों और भारी सुरक्षा बल के साथ रामपुर पहुंच गई थी।
• आजम खान का विरोध: हिरासत में लिए जाने के दौरान आजम खान ने ईडी की कार्रवाई का कड़ा विरोध किया और गाड़ी में बैठने से इनकार कर दिया।
• अब्दुल्ला आजम रिहा: आजम खान के छोटे बेटे अब्दुल्ला आजम पूरी तरह रिहा होकर अपने भाई अदीब के साथ घर लौट गए हैं।
जेल के गेट पर समर्थकों का जमावड़ा और हाई-वोल्टेज ड्रामा
शनिवार शाम जैसे ही आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम जेल से बाहर आए, वहाँ मौजूद सैकड़ों समर्थकों ने उनका स्वागत किया। आजम खान के बड़े बेटे अदीब भी पिता को लेने पहुंचे थे। लेकिन अपनों से मिलने और बात करने से पहले ही ईडी के अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
इस दौरान जेल के बाहर भारी ड्रामा देखने को मिला। आजम खान ने ईडी की इस अचानक हुई कार्रवाई का विरोध किया। उनके समर्थकों ने एजेंसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हालांकि, सुरक्षा घेरे के बीच ईडी की टीम शाम 7:12 बजे आजम खान को अपने साथ लेकर गाजियाबाद के लिए रवाना हो गई।
गाजियाबाद कोर्ट में पेशी और रिमांड की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, ईडी आजम खान को गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेश करेगी, जहाँ एजेंसी उनसे पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड की मांग कर सकती है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई गिरफ्तारी के बाद आजम खान की जेल से बाहर आने की राह एक बार फिर बेहद मुश्किल हो गई है।
अब्दुल्ला की रिहाई पर समर्थकों ने छोड़े पटाखे
एक तरफ जहाँ आजम खान को ईडी अपने साथ ले गई, वहीं दूसरी तरफ अब्दुल्ला आजम की मुकम्मल रिहाई से समर्थकों को थोड़ी राहत जरूर मिली है। अब्दुल्ला आजम जब अपने बड़े भाई अदीब के साथ रामपुर स्थित आवास पहुंचे, तो समर्थकों ने आतिशबाजी कर खुशी जताई। अब्दुल्ला ने घर के बाहर जमा हुए समर्थकों को समझा-बुझाकर वापस भेजा और शांति बनाए रखने की अपील की।
