गोपेश्वर: उत्तराखंड के बदरीनाथ में शुक्रवार को हुए भीषण हेलीकॉप्टर हादसे में जान गंवाने वाले पायलट समेत सभी छह लोगों के शव शनिवार को बरामद कर लिए गए हैं। बेहद दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सेना, आईटीबीपी (ITBP), एसडीआरएफ (SDRF), एनडीआरएफ (NDRF), पुलिस और वन विभाग की संयुक्त रेस्क्यू टीमों को घटनास्थल तक पहुंचने में 24 घंटे से अधिक का समय लगा। सभी शवों को चांई गांव के जंगलों के रास्ते ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) लाया जा रहा है, जहाँ से उन्हें ऋषिकेश एम्स भेजा जाएगा।
खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
• बरामदगी: हादसे में मारे गए पायलट और कर्नाटक के 5 यात्रियों के शव क्षत-विक्षत हालत में मिले।
• बदला गया रूट: पांडुकेश्वर का रास्ता बेहद खतरनाक होने के कारण शवों को लाने के लिए चांई गांव का वैकल्पिक मार्ग चुना गया।
• जांच शुरू: डीजीसीए (DGCA) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की टीम ने घटनास्थल का हवाई निरीक्षण किया।
• शवों को ऋषिकेश भेजने की तैयारी: ज्योतिर्मठ से सभी शवों को ऋषिकेश एम्स भेजा जाएगा, जहाँ उनका पोस्टमार्टम हो सकता है।
भालू का डर और रस्सियों का सहारा: रेस्क्यू में आईं ये बड़ी चुनौतियां
शुक्रवार को बदरीनाथ धाम से देहरादून लौट रहा हेलीकॉप्टर चमोली के पांडुकेश्वर के जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हादसे के तुरंत बाद राहत टीमें रवाना की गई थीं, लेकिन रात के घने अंधेरे और पांडुकेश्वर के जंगलों में भालुओं की मौजूदगी के कारण टीमों को वापस लौटना पड़ा।
शनिवार सुबह 5 बजे दोबारा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। घटनास्थल तक जाने का रास्ता इस कदर खतरनाक था कि जवानों को रस्सियों के सहारे गहरी खाइयों में उतरना पड़ा। टीमों को करीब 100 मीटर तक नई पगडंडी खोदनी पड़ी और उफनते नालों को पार करना पड़ा। दोपहर करीब 1 बजे जब टीम मौके पर पहुंची, तो सेना की सिग्नल कोर के जवान वहाँ पहले से मोर्चा संभाले हुए थे।
पांडुकेश्वर की जगह चांई गांव का रास्ता क्यों चुना गया?
आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी और जिलाधिकारी गौरव कुमार के अनुसार, शवों को वापस पांडुकेश्वर के रास्ते लाना बेहद जोखिम भरा था, क्योंकि वहाँ कोई सुरक्षित मार्ग उपलब्ध नहीं था। इसलिए रणनीति बदलकर चांई गांव के रास्ते का विकल्प चुना गया।
ताजा जानकारी के मुताबिक, एक शव चांई गांव पहुंच चुका है, जबकि बाकी शवों को लेकर रेस्क्यू टीमें रास्ते में हैं। मृतकों के परिजन देहरादून पहुंच चुके हैं, जिन्हें प्रशासन ने ऋषिकेश में ही रुकने की सलाह दी है।
DGCA ने शुरू की जांच, कर्मचारियों के बयान दर्ज
इस भीषण हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की विशेष टीम चमोली पहुंच चुकी है। टीम ने दुर्घटनास्थल का हवाई मुआयना किया और बदरीनाथ हेलीपैड पर जाकर वहाँ तैनात कर्मचारियों के विस्तृत बयान दर्ज किए हैं, ताकि तकनीकी खराबी या मौसम के असर की सही वजह सामने आ सके।
