कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए 23 किसानों का ई-लॉटरी से चयन
कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए 23 किसानों का ई-लॉटरी से चयन
कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए 23 किसानों का ई-लॉटरी से चयन
– छह का स्वतः हुआ चयन, 108 किसानों ने की थी ऑनलाइन बुकिंग
फोटो परिचय- कृषि यंत्रो की ई-लाटरी में भाग लेते सीडीओ व अन्य। एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज फतेहपुर। कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने व किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग की योजनाओं के तहत 23 किसानों का ई-लॉटरी के माध्यम से चयन किया गया। सोमवार को विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी पवन कुमार मीना की अध्यक्षता में गठित जनपद स्तरीय कार्यकारी समिति के समक्ष चयन प्रक्रिया संपन्न हुई। इसके अतिरिक्त कृषि निदेशालय उत्तर प्रदेश स्तर से लक्ष्य के बराबर बुकिंग होने के कारण छह किसानों का स्वतः चयन भी किया गया।
उप निदेशक कृषि ने बताया कि सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन (एसएमएएम) व फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में अनुदान पर कृषि यंत्र खरीदने के लिए 7 से 27 अक्टूबर के बीच ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। इस दौरान 108 किसानों ने विभिन्न कृषि यंत्रों के लिए बुकिंग कराई थी, जिनमें से लक्ष्य के सापेक्ष 23 किसानों का ई-लॉटरी के जरिए चयन किया गया। चयनित किसानों को पैडी स्ट्रॉ रीपर, बेलर, रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, रीपर कम बाइंडर, हे रेक, सुपर सीडर, ऑयल मिल, कल्टीवेटर, पावर टिलर, पैकिंग मशीन, पावर वीडर, मल्टीक्रॉप प्लांटर, मिनी दाल मिल, मिलेट मिल, हैरो, मल्टीक्रॉप थ्रेसर, लेजर लैंड लेवलर और स्ट्रॉ रीपर सहित विभिन्न कृषि यंत्रों पर अनुदान का लाभ मिलेगा।
उप कृषि निदेशक ने चयनित किसानों को बधाई देते हुए निर्देश दिया कि वे पंजीकृत फर्म से निर्धारित मानकों के अनुसार कृषि यंत्र खरीदकर तय समय सीमा में कृषि विभाग के पोर्टल पर बिल अपलोड करें, ताकि सत्यापन के बाद अनुदान की धनराशि उनके खाते में भेजी जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि यंत्र खरीदने से पहले कुल मूल्य की 50 प्रतिशत धनराशि विक्रेता के खाते में किसान को अपने बैंक खाते से ही ट्रांसफर करनी होगी। सत्यापन के दौरान इसका प्रमाण भी प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
इस दौरान जिला कृषि अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, एलडीएम, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी, उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी, प्रगतिशील किसान, स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधि और विभिन्न विकासखंडों के किसान मौजूद रहे।