नई दिल्ली। अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को लगे झटके का असर अब अमेरिकी सीमाओं से बाहर भी दिखाई दे सकता है। पिछले करीब दो वर्षों में ट्रंप ने अमेरिकी विदेश नीति की दशकों पुरानी परंपराओं में कई बड़े बदलाव किए हैं। उनके फैसलों से अमेरिका के सहयोगी देशों के साथ-साथ विरोधी देश भी असहज हुए हैं। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि अमेरिकी संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण होने के बाद ट्रंप की विदेश नीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप ईरान के साथ समझौते का रास्ता अपनाएंगे या सैन्य कार्रवाई को और तेज करेंगे। इसके अलावा इजरायल को मिलने वाले अमेरिकी समर्थन में कितनी कमी आएगी और रूस के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए ट्रंप यूक्रेन पर किस तरह का दबाव बनाएंगे, इन मुद्दों पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रखी जा रही है।
ईरान मना रहा जश्न, लेकिन युद्ध का खतरा बरकरार
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को मिले झटके से ईरान में खुशी का माहौल है, लेकिन तेहरान भविष्य की परिस्थितियों को लेकर सतर्क भी है। ईरान को उम्मीद नहीं है कि केवल चुनावी नतीजों के कारण अमेरिका अपनी विदेश नीति में बदलाव कर देगा।
ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई ने कहा है कि जो लोग यह मान रहे हैं कि अमेरिकी चुनाव के नतीजों से वाशिंगटन की नीतियां बदल जाएंगी, वे बड़ी गलतफहमी में हैं। ईरानी अधिकारियों का भी कहना है कि उनकी रणनीति अमेरिकी चुनावों पर निर्भर नहीं करती। देश एक तरफ कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ संभावित युद्ध की तैयारी भी जारी है।
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के अली वॉएज ने सीएनएन से बातचीत में कहा कि ईरान का युद्ध ट्रंप के लिए राजनीतिक मुश्किल बन गया है। उनके सामने दो रास्ते हैं। पहला, ऐसा समझौता करना जिससे उनकी प्रतिष्ठा बनी रहे और वह जीत का दावा कर सकें। दूसरा, सैन्य कार्रवाई को और तेज करना। उन्होंने आशंका जताई कि चुनाव में कमजोर पड़े राष्ट्रपति अपनी प्रतिष्ठा दोबारा स्थापित करने के लिए सैन्य मोर्चे पर आक्रामक रुख अपना सकते हैं।
इजरायल के साथ अमेरिकी संबंधों में आ सकता है बड़ा बदलाव
अमेरिकी चुनाव परिणामों का इजरायल पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिका में इजरायल को मिलने वाला द्विदलीय समर्थन पहले से ही कमजोर हो रहा था। गाजा युद्ध में बड़ी संख्या में लोगों की मौत को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर इजरायल के प्रति नाराजगी बढ़ी है। वहीं रिपब्लिकन पार्टी में भी ऐसे नेताओं की संख्या बढ़ रही है, जो मानते हैं कि अमेरिका इजरायल को जरूरत से ज्यादा समर्थन दे रहा है।
अमेरिका में इजरायल के पूर्व राजदूत माइकल ओरेन ने कहा कि फिलहाल इजरायल की आलोचना ही ऐसा मुद्दा है, जिस पर अमेरिका के दोनों राजनीतिक दलों में सहमति दिखाई दे रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी सहायता में कटौती केवल शुरुआत हो सकती है।
उनके मुताबिक, भविष्य में अमेरिका इजरायल के साथ खुफिया सूचनाएं साझा करना और महत्वपूर्ण सैन्य प्रणालियों का संयुक्त विकास भी बंद कर सकता है। इसमें इजरायल की प्रसिद्ध आयरन डोम हवाई रक्षा प्रणाली भी शामिल है। ओरेन ने मौजूदा परिस्थितियों को अमेरिका और इजरायल के संबंधों के एक युग का अंत बताया।
ईरान के साथ युद्ध के दौरान अमेरिका में इजरायल विरोधी भावनाएं और मजबूत हुई हैं। अमेरिकी मतदाताओं के एक वर्ग का मानना है कि अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के पीछे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भूमिका थी और उन्होंने ट्रंप को इस युद्ध में शामिल होने के लिए प्रभावित किया।
यूक्रेन को डेमोक्रेट्स से बढ़ी उम्मीद
अमेरिकी चुनाव परिणामों के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को उम्मीद है कि डेमोक्रेटिक पार्टी की मजबूती से रूस के खिलाफ उनके देश को अमेरिकी समर्थन मिल सकता है।
जेलेंस्की ने कहा कि वह रिपब्लिकन नेताओं के भी आभारी हैं, लेकिन डेमोक्रेट्स यूक्रेन को समर्थन और सहायता देने के मुद्दे पर अधिक स्पष्ट रहे हैं। उन्होंने अमेरिका और यूरोप के बीच संबंधों को दोबारा मजबूत करने की डेमोक्रेट्स की बात का भी उल्लेख किया।
जेलेंस्की के मुताबिक, यदि अमेरिकी संसद यूक्रेन को आर्थिक और सैन्य सहायता देने के पक्ष में मजबूत रुख अपनाती है, जैसा कि यूरोपीय देश कर रहे हैं, तो यह सकारात्मक कदम होगा और इसका प्रभाव रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर भी पड़ सकता है।
पिछले कई सप्ताह से जेलेंस्की और ट्रंप के बीच संबंधों में लगातार तनाव देखने को मिला है। ट्रंप ने जेलेंस्की को पद से हटाने की मांग की थी और ऐसे ऊर्जा समझौतों की कोशिश की थी, जिनसे रूस को फायदा हो सकता था।
ऐसे में यूक्रेन की नजर अब अमेरिकी संसद में बदले राजनीतिक समीकरणों पर है। उसे उम्मीद है कि डेमोक्रेट्स के मजबूत होने से रूस के खिलाफ उसकी लड़ाई में अमेरिकी सहायता और समर्थन को लेकर नई संभावनाएं बन सकती हैं।
