टिकट के दावेदारों की हलचल तेज,कोई जनसंपर्क में तो कोई होर्डिंग वार में लगा!

 भारतीय जनता पार्टी के ‘आधा’ दर्जन नेता दूसरे ‘दलों’ में ‘तलाश’ रहे ‘ठिकाना’
टिकट की चाह में राह बदलने को तैयार बैठे हैं भाजपा नेता!
निषाद पार्टी के संपर्क में है जिले के दो कद्दावर नेता!
सपा-भाजपा में जमीन तलाश रहे जनपद के अपना दल के एक नेता!
सपा के पीडीए फार्मूले की घबराहट ने कइयों का डिगा दिया ईमान!
प्रदेश में डेढ़ सौ के करीब विधायकों के टिकट काटने की तैयारी में भाजपा!
टिकट के दावेदारों की हलचल तेज,कोई जनसंपर्क में तो कोई होर्डिंग वार में लगा!
जिले से भी भाजपा काट सकती है टिकट,क्षेत्र बदलने की भी हवा तेज!

एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज — फतेहपुर में मिशन-2027 की शुरू हुई कवायद में टिकटार्थियों की लंबी लाइन भारतीय जनता पार्टी खेमे में देखी जा रही है।किसको टिकट मिलेगा?यह तय नहीं है!लेकिन एक दर्जन से अधिक नेता चुनावी प्रचार में अभी से डट गए हैं। उत्तर प्रदेश की सत्ता में तीसरी बार काबिज होने को लेकर भाजपा में बेचैनी देखी जा रही है।समाजवादी पार्टी के पीडीए ने उनकी उलझन को और बढ़ा रखा है।टिकट पक्का रहे इसके लिए भाजपा के आधा दर्जन से अधिक कद्दावर नेता टिकट की चाह में अपनी राह बदलने तक को तैयार बैठे हैं। खबर है कि ये नेता चुनाव प्रचार तो भाजपा से कर रहे हैं लेकिन दूसरे दलों में भी अपना ठिकाना तलाश रहे हैं।
जिले की 06 विधानसभा सीटों में सबसे अधिक दावेदार भारतीय जनता पार्टी में ही देखे जा रहे हैं। मजबूत दावेदारी की बात अगर की जाए तो अयाह शाह विधायक विकास गुप्ता,खागा सुरक्षित से कृष्णा पासवान अपना टिकट करीब-करीब पक्का ही मान रही हैं जबकि सदर से पूर्व विधायक विक्रम सिंह के बाद पूर्व जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल एवं जितेन्द्र सिंह सेंगर उर्फ पप्पू सिंह ने भी अपनी मजबूत दावेदारी कर दी है।हुसैनगंज से पूर्व मंत्री रणवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ धुन्नी सिंह,जिला पंचायत अध्यक्ष अभय प्रताप सिंह उर्फ पप्पू सिंह दावेदार हैं। बिंदकी विधानसभा अभी गठबंधन के हिस्से में है।पार्टी किसका टिकट तय करेगी यह अभी भविष्य के गर्भ में है लेकिन यहां से मौजूदा कबीना मंत्री राकेश सचान सहित तीन ब्राह्मण दावेदार संतोष तिवारी, पूर्व जिलाध्यक्ष आशीष मिश्र एवं तेलियानी ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि अभिषेक त्रिवेदी शिद्दत के साथ चुनाव मैदान में कूद पड़े हैं।

जहानाबाद विधानसभा में पूर्व विधायक आदित्य पांडे,रेखा मिश्रा की दावेदारी के अलावा सभी विधानसभाओं में भाजपा के करीब 37 दावेदार चुनाव लड़ने की मंशा संजोये बैठे हैं। टिकट की मारामारी सबसे अधिक अगर है तो वह भारतीय जनता पार्टी में है।इतना तय है कि जिस तरीके से समाजवादी पार्टी ने चुनावी वेब बनाना शुरू किया है और लोकसभा चुनाव से शुरू हुए पीडीए फार्मूले ने तेजी पकड़ी है उससे भाजपा की बेचैनी और उलझन बढ़ी हुई है।सत्ता के गलियारों से जो खबर आ रही है उसमें इतना पक्का माना जा रहा है कि करीब डेढ़ सौ मौजूदा विधायकों के भाजपा टिकट काटने जा रही है। कइयों के क्षेत्र बदलेंगे लेकिन इसी बीच जो खबर जिले से है वह भी काम चौंकाने वाली है भाजपा के दावेदार अपना टिकट पक्का करने के लिए दूसरे दलों से भी संपर्क में है।ऐसे 07 नेता हैं जो समाजवादी पार्टी के साथ-साथ निषाद पार्टी एवं बहुजन समाज पार्टी में भी अपना भविष्य तलाश रहे हैं।अपना दल के एक नेता भाजपा एवं सपा में अपने सूत्रों के माध्यम से इंट्री करने की जुगाड़ में है

जबकि अगर जिला छोड़ना पड़े तो वह बांदा और उन्नाव की चिन्हित सीट पर अपनी दावेदारी गुप-चुप तरीके से कर रहे हैं।इतना तय है कि भाजपा प्रदेश की सत्ता तीसरी बार पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा देगी और इसमें उसे जो भी करना पड़े वह सब कुछ करने को तैयार बैठी है लेकिन विधायकी के लिए भाजपा के ही कई कद्दावरों को राह बदलने के लिए मजबूर कर रखा है।वह दूसरे दलों से भी संपर्क कर येन-केन-प्रकारेंण टिकट पाना चाह रहे हैं। चुनावी रणभेरी में बिगुल भले ही अभी न फुंका हो लेकिन भावी विधायकों का चुनावी अभियान तेज हो गया है।कोई जनसंपर्क में है तो कोई होर्डिंग वार में लगा हुआ है। तय पार्टी को करना है कि किससे गठबंधन कर कौन सी सीट दी जाए और टिकट किसे दिया जाए? किसका काटा जाए! लेकिन उसके पहले बड़ी सेंधमारी की तैयारी में अगर कोई है तो भारतीय जनता पार्टी के नेता ही हैं।

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