जिले की आर्या अग्रवाल ने धर्म मंचों पर मचाई धूम, संस्कृत का समंदर

      छह साल की उम्र में संस्कृत का समंदर
जिले की आर्या अग्रवाल ने धर्म मंचों पर मचाई धूम
फोटो परिचय- बालिका आर्या अग्रवाल।
एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ फतेहपुर– जहां इस उम्र के बच्चे खिलौनों और कार्टून की दुनिया में खोए रहते हैं, वहीं फतेहपुर की महज छह वर्षीय बालिका आर्या अग्रवाल अपने अद्भुत संस्कृत ज्ञान, गीता श्लोकों की गूंज और धार्मिक मंचों पर ओजस्वी प्रस्तुति से हर किसी को चकित कर रही हैं। छोटी सी उम्र में आर्या ने जिस तरह सनातन धर्म, संस्कृत व वैदिक मंत्रों को आत्मसात किया है, वह बड़े-बड़ों के लिए भी आश्चर्य का विषय बना हुआ है।
आर्या को एक हजार से अधिक संस्कृत मंत्र कंठस्थ हैं। खास बात यह है कि वह कठिन से कठिन संस्कृत श्लोकों, वैदिक कोड और जटिल मंत्रों का भी शुद्ध उच्चारण के साथ पाठ कर लेती हैं। इतना ही नहीं, उन्हें 50 से अधिक श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक उनके अर्थ सहित याद हैं। परिवार और धर्मगुरुओं का कहना है कि आर्या का बौद्धिक स्तर सामान्य बच्चों से काफी अलग है और उनकी स्मरण शक्ति विलक्षण है। कम उम्र में ही आर्या कई बड़े धार्मिक, सामाजिक और सनातन मंचों पर अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं। अब तक वह 10 से अधिक हिंदू सम्मेलन, कथा मंच और धार्मिक आयोजनों में शामिल होकर मंत्रोच्चारण, धर्म जागरण और सनातन संस्कृति के प्रचार का कार्य कर चुकी हैं। मंच पर उनकी निर्भीक वाणी और स्पष्ट संस्कृत उच्चारण सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध रह जाते हैं। आर्या की प्रतिभा सिर्फ स्थानीय मंचों तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश के कई बड़े संत, कथावाचक और जनप्रतिनिधि भी उनके ज्ञान से प्रभावित हुए हैं। वह वृंदावन में प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त कर चुकी हैं। इसके अलावा कथा वाचक धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री से उनकी चार बार मुलाकात हो चुकी है। प्रख्यात कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने भी उन्हें सम्मानित किया। आर्या राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रविंद्र पुरी से भी भेंट कर चुकी हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर आशीर्वाद ले चुकी हैं। इतना ही नहीं, प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज सर्किट हाउस में उन्हें सम्मानित कर उनकी प्रतिभा की सराहना की थी। परिवार के अनुसार आर्या को बचपन से ही धार्मिक वातावरण मिला। घर में पूजा-पाठ, संस्कृत श्लोक और संत-महात्माओं के सत्संग का असर ऐसा हुआ कि उन्होंने बहुत कम उम्र में ही मंत्र और गीता श्लोक याद करना शुरू कर दिया। आज स्थिति यह है कि वह बिना रुके लंबे वैदिक मंत्रों का पाठ कर लेती हैं।

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