सरोवर में जल विहार कर मंदिर लौटे बांके बिहारी,जयकारों से गूंजा डिघरुवा
सरोवर में जल विहार कर मंदिर लौटे बांके बिहारी,जयकारों से गूंजा डिघरुवा
शंख-घंटों और जयकारों से गूंजा डिघरुवा सरोवर में जल विहार कर मंदिर लौटे बांके बिहारी तीन दिवसीय मेले के समापन पर उमड़ा आस्था का सैलाब
फोटो परिचय-पूजा अर्चना करती भक्त। एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज अमौली/फतेहपुर। विकास खण्ड के ग्राम डिघरुवा स्थित सिद्धपीठ मंदिर में बिराजमान भगवान श्री बांके बिहारी की तीन दिवसीय भव्य शोभा रथ यात्रा, दंगल एवं धार्मिक अनुष्ठानों का श्रद्धा और उल्लास के बीच भव्य समापन हुआ। अंतिम दिन हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और पूरा गांव शंख-घंटों की गूंज तथा ‘श्री बांके बिहारी लाल जी की जय’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। तीन दिनों तक चले आयोजन में भगवान श्री बांके बिहारी जी का रथ शंख, घंटा, संगीत वाद्य यंत्रों और गाजे-बाजे के साथ गांव की गलियों में भ्रमण करता रहा। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने रथ का स्वागत कर भगवान के दर्शन किए और पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। शोभायात्रा के दौरान डिघरुवा में मथुरा-वृंदावन जैसा भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने चंदन तिलक, पुष्प-माल्यार्पण, यज्ञोपवीत, प्रसाद एवं आरती के साथ विधि-विधान से भगवान की पूजा-अर्चना की। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ आयोजित दंगल में पहलवानों ने अपने दमखम का प्रदर्शन किया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों से लोग पहुंचे। शोभा रथ यात्रा के अंतिम दिन परंपरा के अनुसार पुजारी भगवान श्री बांके बिहारी जी की प्रतिमा को गोद में लेकर मंदिर के समीप स्थित सरोवर पहुंचे, जहां भगवान का जल विहार कराया गया। इसके बाद विधि-विधान से स्नान कराकर भगवान का आकर्षक श्रृंगार किया गया। सरोवर से प्रतिमा को पदयात्रा के साथ पुनः मंदिर लाया गया और विधि-विधान से स्थापित किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा करते हुए भगवान के जयकारे लगाए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिरस में डूब गया। आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन भी सतर्क रहा और शोभायात्रा व मेला स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई। कार्यक्रम में कामता प्रसाद शुक्ल, अवधेश शुक्ल, आदित्य शुक्ल, सलोनी, सुनीता, नीता, दीक्षा, दिव्यांशु, आशुतोष, अभिनव, शार्विल, सात्विक शुक्ल, आलोक, सुमित समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं, पुरुष, बच्चे एवं संभ्रांत नागरिक शामिल हुए। तीन दिवसीय यह आयोजन धार्मिक आस्था, परंपरा, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया। समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्री बांके बिहारी जी से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।