केंद्र सरकार पर 3.56 लाख पुराने मुकदमों का बोझ, 41 मंत्रालयों में अब तक लीगल सेल का गठन नहीं

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के सामने लंबित मुकदमों का बढ़ता बोझ बड़ी चुनौती बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पांच वर्ष से अधिक पुराने 3,56,215 मुकदमे लंबित हैं। हैरानी की बात यह है कि इन मामलों के बेहतर प्रबंधन के लिए 41 मंत्रालयों और विभागों ने अब तक लीगल मैनेजमेंट सेल का गठन नहीं किया है।

कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने मंत्रालयों और विभागों के सचिवों के साथ बैठक कर मुकदमों की स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान सभी संबंधित विभागों को नवंबर के अंत तक लीगल मैनेजमेंट सेल गठित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही ऐसे मामलों की पहचान करने को कहा गया है, जिन्हें वापस लिया जा सकता है या आपसी सहमति से निपटाया जा सकता है।

19 हाई कोर्ट में एक लाख से अधिक मामले लंबित

समीक्षा में सामने आया कि पांच साल से ज्यादा समय से लंबित कुल मुकदमों में 1,05,809 मामले देश के 19 हाई कोर्ट में चल रहे हैं। विभागों के लिहाज से राजस्व विभाग सबसे आगे है, जिसके 1,27,675 मामले लंबित हैं।

मुकदमों के प्रबंधन को लेकर मंत्रालयों की सुस्ती का एक और उदाहरण सामने आया है। लिटिगेशन गवर्नेंस के तहत अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए सितंबर 2026 में प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन अधिकारियों के नामांकन नहीं होने के कारण यह आयोजित नहीं हो सका।

जन विश्वास कानून के तहत पुराने मुकदमों की होगी समीक्षा

सरकार ने मंत्रालयों और विभागों को जन विश्वास कानून के प्रावधानों के तहत उन मामलों की पहचान करने को कहा है, जिनमें कुछ उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है। ऐसे मुकदमों को वापस लेने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।

इसके अलावा लंबित मामलों को मध्यस्थता और आपसी समझौते के जरिए सुलझाने पर जोर दिया गया है। सरकार का निर्देश है कि नया मुकदमा दायर करने से पहले संबंधित विभाग यह भी देखें कि विवाद का समाधान बातचीत या मध्यस्थता से संभव है या नहीं।

नवंबर में शुरू होगा लिटिगेशन मैनेजमेंट पोर्टल

सरकार इसी महीने एक नया लिटिगेशन मैनेजमेंट पोर्टल शुरू करने की तैयारी में है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मंत्रालयों और विभागों में गठित लीगल मैनेजमेंट सेल की कार्यप्रणाली, पुराने मुकदमों की स्थिति, अपील, मध्यस्थता और मामलों की स्क्रीनिंग पर नजर रखी जाएगी।

पोर्टल शुरू होने के बाद सभी मंत्रालयों और विभागों को निर्धारित मानकों के अनुसार लंबित मुकदमों का विवरण नियमित रूप से अपडेट करना होगा।

इन विभागों में सबसे ज्यादा मुकदमे लंबित

लंबित मामलों के आंकड़ों में प्रमुख विभागों की स्थिति इस प्रकार है—

– राजस्व विभाग — 1,27,675 मामले
– रेलवे मंत्रालय — 45,583 मामले
– सैन्य मामलों का विभाग — 32,464 मामले
– श्रम एवं रोजगार — 28,822 मामले
– कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय — 27,109 मामले
– सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय — 14,331 मामले
– रक्षा विभाग — 13,373 मामले
– गृह विभाग — 9,658 मामले
– डाक विभाग — 6,792 मामले
– दूरसंचार विभाग — 5,242 मामले

लीगल मैनेजमेंट सेल का गठन नहीं करने वाले विभागों में राजस्व, डाक, रक्षा, सैन्य मामलों, गृह, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा भूमि संसाधन विभाग सहित कई अन्य विभाग शामिल हैं।

सरकार का उद्देश्य अनावश्यक मुकदमों को कम करना, पुराने मामलों का समयबद्ध निपटारा करना और न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाले समय तथा संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।

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