करोड़ों की योजनाओं के बावजूद नहीं बदली गांवों की तस्वीर
करोड़ों की योजनाओं के बावजूद नहीं बदली गांवों की तस्वीर
विकसित भारत का सपना, बदहाल गांवों की हकीकत!! करोड़ों की योजनाओं के बावजूद नहीं बदली गांवों की तस्वीर, बरसात में खुल रही विकास कार्यों की पोल!!
————- नागेंद्र सिंह अध्यक्ष फतेहपुर प्रेस क्लब — फतेहपुर। केंद्र और प्रदेश सरकार विकसित भारत का सपना साकार करने की बात कर रही हैं, लेकिन फतेहपुर जनपद के सैकड़ों गांव आज भी जलभराव, जल निकासी, टूटी सड़कें और शुद्ध पेयजल जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। बरसात शुरू होते ही गांवों की बदहाल तस्वीर सामने आने लगी है, जिससे विकास कार्यों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बारिश के दौरान ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूल जाने वाले बच्चों को भी गंदे पानी से भरी गलियों से होकर गुजरना पड़ता है। यह स्थिति कोई नई नहीं है, बल्कि वर्षों से बरसात के मौसम में यही हाल देखने को मिलता है। आजादी के दशकों बाद भी ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं, जबकि गांवों के विकास के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाने का दावा किया जाता है।
विकास भवन से लेकर खंड विकास कार्यालय और ग्राम पंचायत तक विभिन्न योजनाएं पहुंचती हैं, लेकिन उनका असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देता। बहुआ विकासखंड के कंचनपुर गांव में जलभराव की समस्या गंभीर बनी हुई है, जबकी एराया विकासखंड के जगजीवनपुर गांव का मुख्य मार्ग विकास कार्यों की हकीकत बयां कर रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी धन का सही उपयोग नहीं हुआ, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
इसी तरह विजयीपुर विकासखंड के चौराहे, मोंगरिहापुर गांव तथा धाता विकासखंड के बसवा गांव में भी सड़क, जल निकासी और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है। इन गांवों की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि विकास योजनाएं अपने मूल उद्देश्य से भटक गई हैं और ग्रामीणों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सरकार आगामी वर्षों में विकसित भारत के संकल्प को दोहरा रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली बड़ी आबादी आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि गांवों के विकास के लिए आवंटित सरकारी धन आखिर कहां खर्च हो रहा है और उसका लाभ ग्रामीणों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास भवन से लेकर ग्राम पंचायत तक योजनाओं के संचालन और खर्च की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके और गांवों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।