पोलैंड में न्यायपालिका पर आर-पार: प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के कड़े फैसलों से भड़का संवैधानिक गतिरोध, सड़कों पर उतरे लोग, भारी पुलिस बल तैनात

वारसॉ: यूरोप के प्रमुख देश पोलैंड में इस समय सरकार और संवैधानिक संस्थाओं के बीच ठन गई है, जिससे देश एक गंभीर प्रशासनिक संकट में फंस चुका है। राजधानी वारसॉ की सड़कों पर आम जनता और सरकार विरोधी गुट लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बखेड़े की मुख्य वजह वहां के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति गुट के बीच न्यायपालिका पर नियंत्रण को लेकर जारी वर्चस्व की जंग है।
हालिया घटनाक्रम में, पोलैंड के ट्रिब्यूनल चीफ बोगदान श्विएचकोव्स्की और उनके सहयोगी बार्टलोमी सोचान्स्की को सरकार ने एक महीने के लिए सस्पेंड कर दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद अदालत परिसर के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने पड़े हैं और दंगा नियंत्रण पुलिस की तैनाती की गई है।
आखिर कहां से शुरू हुआ यह पूरा विवाद?
पोलैंड में सत्ता और अदालत के बीच जारी इस रस्साकशी की कहानी साल 2015 से जुड़ी है। उस समय देश की कमान संभालने वाली राष्ट्रवादी ‘लॉ एंड जस्टिस’ (PiS) पार्टी पर आरोप लगे थे कि उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर अपने वफादार जजों की नियुक्तियां कर दी थीं।
तत्कालीन सरकार के इस कदम का यूरोपीय अदालतों ने पुरजोर विरोध किया था और पोलैंड की न्यायिक निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे। इस मनमानी के चलते यूरोपीय यूनियन (EU) ने पोलैंड पर बड़ा आर्थिक जुर्माना भी लगाया था।
डोनाल्ड टस्क का न्यायिक सुधार अभियान
साल 2023 के आम चुनावों के बाद पोलैंड की राजनीतिक तस्वीर बदली और डोनाल्ड टस्क देश के नए वजीर-ए-आला बने। टस्क ने देश की जनता से वादा किया था कि वे न्यायपालिका को राजनीतिक दबाव से मुक्त कराएंगे। प्रधानमंत्री की गद्दी संभालते ही टस्क ने पिछली सरकार द्वारा की गई विवादित नियुक्तियों को निरस्त करना शुरू कर दिया। सरकार के इसी रुख के खिलाफ PiS समर्थित धड़ा अब लामबंद हो चुका है।
नियुक्तियों और शपथ ग्रहण पर अड़ा रोड़ा
यह टकराव उस समय और बदतर हो गया जब संसद की तरफ से चुने गए नए जजों की राह में रोड़े अटकाए जाने लगे। इस साल संसद द्वारा भेजे गए 6 न्यायाधीशों में से 3 को पद की शपथ दिलाने से साफ मना कर दिया गया। सरकार द्वारा हटाए गए मुख्य न्यायाधीश बोगदान श्विएचकोव्स्की ने वर्तमान संसद के बहुमत द्वारा तय किए गए जजों को काम शुरू करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है।
पीएम टस्क का दोटूक बयान: ‘सिस्टम को सुधारने के लिए कड़े कदम जरूरी’
न्यायाधीशों के निलंबन पर खड़े हो रहे सवालों का जवाब खुद प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर अपनी सरकार का पक्ष रखते हुए लिखा कि देश में फिर से कानून का राज कायम करना उनकी पहली प्राथमिकता और कर्तव्य है।
टस्क ने साफ किया कि पिछली सरकार के वर्षों के कुशासन के बाद तंत्र को दोबारा पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना एक बेहद जटिल और दर्दनाक काम है, जिसके लिए कुछ कड़े फैसले लेने ही होंगे। इसके अलावा देश को बचाने का कोई दूसरा शॉर्टकट नहीं है।

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