पहियों पर चला बदलाव का संदेश, बाल विवाह मुक्ति रथ ने जगाई नई चेतना

  पहियों पर चला बदलाव का संदेश, बाल विवाह मुक्ति रथ ने जगाई नई चेतना

नहीं होगा बचपन का सौदा. बाल विवाह के खिलाफ उठी आवाज

ब्यूरो सुरेंद्र धुरिया अज़रा न्यूज बांदा — जिले में बचपन को बंधनों से मुक्त करने का संदेश लेकर निकला बाल विवाह मुक्ति रथ पिछले एक महीने तक गांव-गांव और कस्बों में जागरूकता की मशाल जलाता रहा भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के 100 दिवसीय गहन अभियान के तहत शुरू हुई इस पहल को ग्रामीण परंपरा विकास संस्थान और जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोग से व्यापक जन समर्थन मिला


बांदा- चित्रकूट की सांसद द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किए गये इस रथ ने 30 दिनों में जिले के 150 गांव तक पहुंच कर हजारों लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक किया अभियान के दौरान छात्रों, धर्मगुरुओं, पंचायत प्रतिनिधियों और विवाह समारोह में सेवाएं देने वाले कैटरर्स, बैंड व घोड़ी संचालकों को भी जोड़ा गया और उनसे अपील की गई कि वे बाल विवाह में किसी भी प्रकार की भागीदारी से इंकार करें लोगों को शपथ दिलाते हुए समझाया गया कि बाल विवाह केवल सामाजिक कुप्रथा नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों पर हमला और कानून की नजर में दंडनीय अपराध है ग्रामीण परंपरा विकास संस्थान के सचिव श्रवण कुमार ने कहा कि यह यात्रा केवल प्रतीक नहीं बल्कि पहियों पर चलती सामाजिक चेतना थी जिसे लोगों को यह समझाया कि बाल विवाह है बच्चों के भविष्य शिक्षा और स्वास्थ्य पर गहरा आघात करता है 8 मार्च 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर नरैनी ब्लाक के बदौसा क्षेत्र के ग्राम पंचायत उदयपुर में कैंडल मार्च के साथ इस अभियान का समापन हुआ लेकिन बांदा को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प अब जन आंदोलन का रूप ले चुका है इस अभियान में महिलाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा रही।

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