बीमा क्लेम लेने के बाद भी नहीं सुधरी कार, आयोग ने कंपनी को लगाई फटकार
बीमा क्लेम लेने के बाद भी नहीं सुधरी कार, आयोग ने कंपनी को लगाई फटकार
2.37 लाख का बीमा क्लेम लेने के बाद भी नहीं सुधरी कार, आयोग ने कंपनी को लगाई फटकार
एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज़ फतेहपुर — वाहन मरम्मत में लापरवाही और बीमा दावे की राशि प्राप्त करने के बावजूद संतोषजनक कार्य न किए जाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने कार कंपनी के अधिकृत सेवा केंद्र माई कार प्राइवेट लिमिटेड बांदा को वाहन की समुचित मरम्मत करने तथा शिकायतकर्ता को 20 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है।
सिविल लाइंस निवासी सरोज देवी ने आयोग में दायर परिवाद में बताया था कि दुर्घटना के बाद उनकी कार को मरम्मत के लिए अधिकृत सेवा केंद्र में दिया गया था। वाहन की मरम्मत के लिए बीमा कंपनी से लगभग 2.37 लाख रुपये का क्लेम प्राप्त किया गया,उसके बाद भी प्रतिनि से 25000 रस ऐंठे गये लेकिन इसके बावजूद वाहन में कई तकनीकी खामियां बनी रहीं। शिकायतकर्ता का आरोप था कि बीमा राशि खर्च होने के बाद भी वाहन की मरम्मत गुणवत्तापूर्ण ढंग से नहीं की गई और वाहन में बार-बार समस्याएं आती रहीं।
सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों के तर्कों एवं उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण किया। आयोग ने पाया कि वाहन की मरम्मत और तकनीकी जांच में अपेक्षित सावधानी नहीं बरती गई, जिसके कारण उपभोक्ता को आर्थिक, शारीरिक एवं मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
आयोग के अध्यक्ष राम नरेश मौर्य एवं सदस्य पद्मिनी आनंद की पीठ ने आदेश दिया कि विपक्षी सेवा केंद्र दो माह के भीतर वाहन की सभी कमियों को दूर कर उसे पूरी तरह दुरुस्त करे। साथ ही शिकायतकर्ता को मानसिक एवं शारीरिक कष्ट तथा वाद व्यय के मद में 20 हजार रुपये का भुगतान भी करे।
परिवादी की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ कक्कड़ एवं धीरेन्द्र कुमार ने प्रभावी पैरवी की। आयोग के इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्णय से यह संदेश गया है कि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण सेवा उपलब्ध कराना सेवा प्रदाताओं की जिम्मेदारी है और इसमें लापरवाही बरतने पर उन्हें जवाबदेह ठहराया जा सकता है।