बुंदेलखंड इंसाफ सेना ने खनन पट्टा निरस्त करने की मांग की सौंपा ज्ञापन
बुंदेलखंड इंसाफ सेना ने खनन पट्टा निरस्त करने की मांग की सौंपा ज्ञापन
बुंदेलखंड इंसाफ सेना ने खनन पट्टा निरस्त करने की मांग की पेयजल समस्या का हवाला देकर सौंपा ज्ञापन
ब्यूरो सुरेंद्र धुरिया अजरा न्यूज़ — बांदा। केन नदी के किनारे प्रस्तावित बालू-मौरंग खनन लीज को जनहित में निरस्त कराने की मांग को लेकर बुंदेलखंड इंसाफ सेना ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। संगठन ने प्रस्तावित खनन स्थल के आसपास पेयजल आपूर्ति व्यवस्था, ऐतिहासिक स्मारक और निर्माणाधीन नदी पुल की सुरक्षा से जुड़े बिंदुओं का हवाला देते हुए संयुक्त स्थलीय जांच कराने की मांग की है।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एएस नोमानी ने ज्ञापन में कहा कि ग्राम दुरेड़ी में केन नदी के किनारे एम/एस ओम ट्रेडर्स की 24 हेक्टेयर यानी करीब 59.30 एकड़ क्षेत्रफल वाली रिवर बेड सैंड/मौरंग माइनिंग लीज प्रस्तावित है। संगठन का कहना है कि स्थल की भौतिक परिस्थितियां खनन कार्य के अनुकूल नहीं हैं, इसलिए लीज स्थल की जांच कराकर जनहित में आवश्यक कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन में बताया गया कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र के पिलर से ओवरहेड वाटर टैंक की दूरी करीब 140 मीटर है। संगठन ने आशंका जताई कि नदी तल में खनन से जलापूर्ति संरचना की स्थिरता और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसी तरह पिलर ए से भूरागढ़ किले की दूरी करीब 400 मीटर बताई गई है। संगठन ने भूरागढ़ किले को एएसआई संरक्षित स्मारक बताते हुए खनन गतिविधि से संभावित प्रभावों को देखते हुए स्थल का दोबारा परीक्षण कराने की मांग की। ज्ञापन में पिलर डी और ई के समीप जलापूर्ति की पक्की नाली होने का भी उल्लेख किया गया है। संगठन के अनुसार खनन गतिविधि से नाली को नुकसान पहुंचने और आसपास की जलापूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। निर्माणाधीन नदी पुल को लेकर भी संगठन ने चिंता जताई। ज्ञापन में कहा गया कि प्रस्तावित लीज क्षेत्र के पिलर एच से पुल की दूरी करीब 100 मीटर है। संगठन ने नदी तल में खनन से पुल की नींव, एबटमेंट, पिलर और समग्र संरचनात्मक सुरक्षा पर संभावित प्रभाव की आशंका जताते हुए जांच की मांग की है। संगठन ने मांग की कि खनन विभाग, सिंचाई/जल संसाधन विभाग, जल निगम या जलापूर्ति विभाग, लोक निर्माण विभाग और जहां आवश्यक हो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों की संयुक्त टीम से स्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाए। जांच में जलापूर्ति संरचनाओं, भूरागढ़ किले और निर्माणाधीन पुल से खनन क्षेत्र की वास्तविक दूरी तथा संबंधित सुरक्षा मानकों की जांच कराने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया कि यदि जांच के दौरान संगठन की ओर से बताए गए तथ्य सही पाए जाते हैं तो एम/एस ओम ट्रेडर्स की उक्त खनन लीज को निरस्त किया जाए, ताकि जलापूर्ति व्यवस्था, सार्वजनिक संपत्तियों, पुल और संरक्षित स्मारक को संभावित नुकसान से बचाया जा सके। संगठन ने चेतावनी दी कि एक माह के भीतर लीज निरस्त नहीं की गई तो बुंदेलखंड इंसाफ सेना के पदाधिकारी और कार्यकर्ता अशोक लाट तिराहे पर आमरण अनशन शुरू करेंगे। ज्ञापन में इसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होने की बात कही गई है।संगठन ने ओवरहेड वाटर टैंक से करीब 140 मीटर, भूरागढ़ किले से करीब 400 मीटर और निर्माणाधीन नदी पुल से करीब 100 मीटर की दूरी का उल्लेख करते हुए इन संरचनाओं की सुरक्षा के लिए संयुक्त स्थलीय जांच की मांग की है। ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल वर्मा, राजेश कुमार, राजकरण, चौकीदार, छोटा वर्मा, शिवकुमार, फरीदा, चुन्नू, तबस्सुम, शिबू, साजिद खान, छोटा तिवारी, हरिलाल, मुकीम, शकील आदि मौजूद रहे।