मौसम बदलते ही धान पर पत्ती लपेटक का हमला, सतर्क रहने की सलाह
मौसम बदलते ही धान पर पत्ती लपेटक का हमला, सतर्क रहने की सलाह
मौसम बदलते ही धान पर पत्ती लपेटक का हमला – किसानों को सतर्क रहने की सलाह एम ज़र्रेयाब खान अज़रा न्यूज फतेहपुर। अतिवृष्टि के बाद तापमान में अचानक वृद्धि व खेतों में अत्यधिक नमी के चलते खरीफ की प्रमुख फसल धान में पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप बढ़ने की आशंका है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
कृषि विभाग के अनुसार पत्ती लपेटक कीट की सूंडी धान की पत्तियों को रेशमी धागे से मोड़कर अंदर छिप जाती है और पत्ती के हरे हिस्से को खुरचकर खाती है। इससे पत्तियों पर सफेद पारदर्शी धारियां दिखाई देने लगती हैं। अधिक प्रकोप होने पर पूरा खेत दूर से झुलसा हुआ नजर आ सकता है। पत्तियों का हरा भाग नष्ट होने से पौधों की वृद्धि प्रभावित होने के साथ उत्पादन में भी कमी आ सकती है। विभाग ने बताया कि यदि खेत में प्रति पौधा एक-दो मुड़ी पत्तियां या दस प्रतिशत से अधिक प्रभावित पत्तियां दिखाई दें तो किसान तत्काल प्रबंधन शुरू करें। शुरुआती प्रकोप में 10-12 मीटर लंबी रस्सी को फसल के ऊपर से खींचकर मुड़ी पत्तियों को खोलने और सूंडियों को पानी में गिराने का उपाय किया जा सकता है। इसके अलावा खेत के पास लाइट ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है। किसानों को अत्यधिक यूरिया के प्रयोग से बचने, खेत की मेड़ों व आसपास की खरपतवार साफ रखने तथा उचित दूरी पर धान की रोपाई करने को कहा गया है। खेत में मकड़ी, लेडीबर्ड बीटल और ड्रैगनफ्लाई जैसे मित्र कीटों का संरक्षण भी पत्ती लपेटक के नियंत्रण में सहायक है। प्रकोप की शुरुआत में ट्राइकोग्राम कार्ड तथा नीम आधारित जैविक उपायों का प्रयोग किया जा सकता है। आर्थिक क्षति स्तर से अधिक प्रकोप होने पर कृषि विभाग की संस्तुति के अनुसार उचित कीटनाशक का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।